छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के 10वें प्रांतीय सम्मेलन में तकनीकी पर हुआ विमर्श

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On सितम्बर 28, 2026
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छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के 10वें प्रांतीय सम्मेलन

बेमेतरा, 28 सितंबर 2026। माटी के भाखा मा हृदय के स्पंदन बसे रहिथे, अउ जे भाषा अपन पुरखा मन ला सुरता रखथे, ओखर संस्कृति सदा अमर रहिथे। इसी भाषाई और सांस्कृतिक चेतना को केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का 10वां प्रांतीय सम्मेलन 26–27 सितंबर 2026 को बेमेतरा स्थित होटल द किंग्स महल में संपन्न हुआ। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य, लोक-अभिव्यक्ति, आंचलिक बोलियों, शब्दकोश निर्माण तथा बदलते डिजिटल परिवेश में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर व्यापक अकादमिक एवं साहित्यिक विमर्श हुआ।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से 500 से अधिक साहित्यकारों, भाषाविदों, कवियों और शोधार्थियों ने सहभागिता की। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पुरोधा साहित्यकारों के योगदान, भाषाई विरासत, आंचलिक अभिव्यक्तियों और समकालीन तकनीकी माध्यमों के संदर्भ में भाषा के भविष्य पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का औपचारिक एवं सांस्कृतिक शुभारंभ नागरिक अभिनंदन तथा पारंपरिक आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा ने सम्मेलन को बेमेतरा जिले के लिए महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं भाषाई आयोजन बताया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार सी.पी. तिवारी, श्याम कश्यप ‘बेचैन’ और मयाराम नेताम , बी पी मिश्र अनाम को राज्य स्तरीय नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया।

पूर्व विधायक अवधेश सिंह चंदेल ने वरिष्ठ साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया, जबकि बेमेतरा विधायक दीपेश साहू ने भाषा एवं साहित्य के अकादमिक तथा दीर्घकालिक विकास के लिए शासन-प्रशासन की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

मुख्य अतिथि, दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल, ने पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे, डॉ. खूबचंद बघेल तथा पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए संसद में प्रयास जारी रखने की बात कही। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने जनकवि लक्ष्मण मस्तूरिया की रचना “मोर संग चलव रे” की संगीतमय प्रस्तुति दी।

भाषा और तकनीक का समकालीन संवाद

सम्मेलन के एक तकनीकी सत्र में AI आधारित ‘छत्तीसगढ़ राजभाषा गीत एवं गान’ का प्रदर्शन किया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और नई तकनीकी माध्यमों द्वारा व्यापक प्रसार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रस्तुति से जुड़े डॉ. अंकुर शुक्ला (अंकुर विनोद ‘खावर’) ने AI तकनीक के माध्यम से तैयार रचनाओं को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटल भविष्य पर विचार रखा।

सम्मेलन में AI को किसी एक व्यक्ति-केंद्रित उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि भाषाई संरक्षण और डिजिटल अभिलेखीकरण के उभरते माध्यम के रूप में चर्चा का विषय बनाया गया। विद्वानों ने इस बात पर विचार किया कि तकनीक का उपयोग स्थानीय शब्द-संपदा, लोकभाषाओं, साहित्य और मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण के लिए किस प्रकार किया जा सकता है।

‘पुरखा के सुरता’: साहित्यिक विरासत का पुनर्पाठ

सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित ‘पुरखा के सुरता’ सत्र में छत्तीसगढ़ के प्रमुख साहित्यकारों और उनकी साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित चर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ भाषाविद् डॉ. चितरंजन कर ने की और संचालन राघवेंद्र दुबे ने किया।

सत्र में अरुण कुमार निगम ने जनकवि कोदूराम ‘दलित’ के काव्य एवं जीवन-दर्शन, श्रीमती शशि दुबे ने पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की कृतियों तथा डॉ. परदेशी राम वर्मा एवं डूमन लाल ध्रुव ने छत्तीसगढ़ के राजगीत के रचयिता डॉ. नरेंद्र देव वर्मा पर एवं छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र ने हरि ठाकुर के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

छठवें सत्र में प्रादेशिक बोलियों एवं आंचलिक अभिव्यक्तियों पर विमर्श हुआ। में श्रीमती शकुंतला तरार ने सहभागिता की और हल्बी भाषा में वक्तव्य प्रस्तुत किया, जिसके माध्यम से बस्तर की विशिष्ट भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपरा को मंच पर अभिव्यक्ति मिली। सरगुजा से आए श्रीश मिश्र ने सरगुजिहा और छत्तीसगढ़ी के परस्पर साम्य की बात कही, डाक्टर इशा बेला लकड़ा ने कुड़ुख पर वक्तव्य प्रस्तुत किया , अध्यक्षता बलदाऊ राम साहू ने की

छत्तीसगढ़ी शब्दकोश की शताब्दी यात्रा

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ी शब्दकोश-निर्माण और Lexicography की 1921 से 2026 तक की विकास-यात्रा पर शोधपरक चर्चा हुई। इसमें 1921 में रेवरेंड एमाईल वोल्फगांग मेंज़ल द्वारा प्रकाशित प्रारंभिक छत्तीसगढ़ी शब्दकोश से लेकर विभिन्न कालखंडों में हुए शब्द-संग्रह और शब्दकोश निर्माण के प्रयासों का उल्लेख किया गया।

चर्चा में 1965 के लगभग 60 हजार शब्दों वाले संकलन, 2011 में डॉ. महावीर अग्रवाल के प्रयास, 2012 में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा तैयार 25 हजार शब्दों के ‘क्रांति शब्दकोश’, 2019 में एससीईआरटी द्वारा कक्षा 1 से 8 के लिए तैयार ‘आखर कोष’ तथा 2021 में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा जारी द्विभाषी शब्दकोश का उल्लेख किया गया।

वक्ताओं ने ग्रामीण और ठेठ आंचलिक शब्दावली के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध शब्द-संसाधनों को विस्तार देने तथा स्थानीय शब्द-संपदा को भविष्य के शब्दकोशों में समाहित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

साहित्यिक संध्या और कवि सम्मेलन

सम्मेलन की साहित्यिक संध्या में प्रसिद्ध गीतकार एवं कवि मीर अली मीर ने काव्य-पाठ किया। उन्होंने आयोग द्वारा युवा और वरिष्ठ कवियों को मंच उपलब्ध कराने के लिए अपनाई गई पर्ची-बॉक्स प्रणाली का उल्लेख किया। आयोजन समिति के अनुसार, इस व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न रचनाकारों को प्रस्तुति का अवसर मिला और कवि सम्मेलन देर रात लगभग 2:00 बजे तक जारी रहा।

सम्मेलन के आयोजन एवं व्यवस्थापन में आदर्श दुबे, सुनैना मार्को और पद्मलोचन शर्मा सहित स्थानीय आयोजन समिति संयोजक रामानंद त्रिपाठी एवं उनकी प्रबंधन टीम की भूमिका रही।

सांसद विजय बघेल, विधायक दीपेश साहू, पूर्व विधायक अवधेश सिंह चंदेल, नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा, आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार और अध्यक्ष प्रभात मिश्रा सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे

भाषा-संरक्षण से भविष्य की ओर

बेमेतरा में आयोजित इस सम्मेलन ने छत्तीसगढ़ी भाषा की साहित्यिक परंपरा, लोक-स्मृति और आंचलिक विविधता को समकालीन अकादमिक विमर्श तथा डिजिटल तकनीक के साथ जोड़ने का अवसर प्रदान किया। दो दिनों तक चले सत्रों में साहित्यिक विरासत के पुनर्पाठ से लेकर शब्दकोश निर्माण, क्षेत्रीय बोलियों के संरक्षण और नई तकनीकी संभावनाओं तक विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ।

सम्मेलन का व्यापक संदेश रहा कि भाषा का संरक्षण केवल उसकी पुरानी विरासत को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उसकी शब्द-संपदा, साहित्य, लोक-अभिव्यक्तियों और सांस्कृतिक स्मृति को नई पीढ़ियों तक पहुंचाते हुए उसके भविष्य के लिए नए माध्यम विकसित करना भी है।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।