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होर्मुज संकट से निकालने का विकल्प देगा भारत, बनी रणनीति, जल्द होगा अमल!

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अक्टूबर 22, 2026
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होर्मुज संकट से निकालने का विकल्प देगा भारत

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026। ईरान और अमेरिका के बीच विवाद से होर्मुज का संकट गहरा गया है। भारत अब इस संकट से निकालने का विकल्प देगा। इस रणनीति से अमेरिका के भी सहमत होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा है कि हम भारत से डील के करीब हैं। डील लगभग हो चुकी है। इस बार की डील सभी से अलग है।

ट्रंप के इस संकेत से पहले अमेरिका के विदेश सचिव रूबियो ने भारत दौरा किया। उन्होंने देश के दो बड़े उद्योगपतियों अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी और रिलायंस समूह के प्रमुख मुकेश अंबानी से मुलाकात की। उन्होंने गुजरात के जामनगर में रिलायंस के रिफाइनरी को भी देखा और वहां की टेक्नोलाजी का समझा। इससे पहले उन्होंने भारत के विदेश मंत्री और मोदी सरकार के अहम रणनीतिकार डॉ एस जयशंकर के साथ अहम बैठक की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज संकट के चलते अमेरिका में भी तेल का संकट गहरा गया है। हाल ही में अमेरिका ने इससे निपटने के लिए रूस से तेल आयात करने की डील किया है। दूसरी तरफ अमेरिका ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को प्यूरीफाई कराने के लिए जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी से सहयोग लेने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगर यह डील पूरी हो गयी तो तेल आपूर्ति में होर्मुज का रोल ही खत्म हो जाएगा।

कैसे दूर होगा होर्मुज का संकट

इस जटिल सवाल को समझने के लिए तीन अलग-अलग बिंदुओं पर नजर डालनी होगी। रूस से भारत आने वाला कच्चा तेल किस समुद्री रास्ते से आता है, होर्मुज जलडमरूमध्य की इसमें क्या भूमिका है और भारत से अमेरिका तक पेट्रोल-डीजल या अन्य रिफाइंड उत्पाद कैसे पहुंचते हैं।

महत्वपूर्ण यह है कि रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल के हर जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना जरूरी नहीं है। रूस के तेल के स्रोत और लोडिंग पोर्ट के आधार पर समुद्री रास्ता अलग-अलग हो सकता है।

रूस से भारत किस रास्ते आता है तेल

रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल के तीन रास्ते हैं। पहला रास्ता है रूस के बाल्टिक सागर वाले बंदरगाहों से, इसका प्रमुख बंदरगाह है प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा। रूस के इस बंदरगाह से उत्तरी सागर, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य, भूमध्य सागर, स्वेज नहर, लाल सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, अरब सागर होते हुए भारत के पश्चिमी तट पर स्थित जामनगर बंदरगाह पर आपूर्ति होती है। इसके लिए होर्मुज से गुजरना जरूरी नहीं है।

दूसरा रास्ता है रूस के काला सागर वाले बंदरगाह से। इसका प्रमुख बंदरगाह है नोवोरोस्सिय्स्क। यहां से काला सागर, तुर्किये के जलडमरूमध्य, भूमध्य सागर, स्वेज नहर, लाल सागर, बाब-अल-मंदेब, अरब सागर होते हुए जहाज भारत पहुंचता है। इस रास्ते में भी होर्मुज की जरूरत नहीं है।

तीसरा रास्ता है रूस के प्रशांत महासागर वाले बंदरगाह से। इसका प्रमुख बंदरगाह है कोज़मिनो। यहां से रूस का प्रशांत तट, पूर्वी एशिया का समुद्री क्षेत्र, मलक्का जलडमरूमध्य, हिंद महासागर, अरब सागर होते हुए जहाज भारत पहुंचता है। इस रास्ते में भी होर्मुज की जरूरत नहीं है।

ThePrint में प्रकाशित 1 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए रूसी कच्चे तेल का प्रमुख समुद्री मार्ग बाल्टिक सागर के बंदरगाहों से स्वेज नहर होकर आता है। काला सागर से भी महत्वपूर्ण मात्रा में तेल आता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व क्या

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के कुछ प्रमुख ऊर्जा निर्यात मार्ग इससे जुड़े हैं। इसलिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल के लिए होर्मुज महत्वपूर्ण है, लेकिन रूस के बाल्टिक, काला सागर या प्रशांत बंदरगाहों से सीधे भारत आने वाले तेल के लिए यह अनिवार्य मार्ग नहीं है।

भारत से अमेरिका को तेल भेजना हो तो रास्ता क्या होगा

भारत रूस से कच्चा तेल आयात करता है, फिर जामनगर जैसी रिफाइनरी में उसे प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पाद बनाता है। अमेरिका को भेजे जाने वाले उत्पादों का रास्ता उनके गंतव्य बंदरगाह पर निर्भर करेगा। जामनगर से अमेरिका तक के भी अलग-अलग समुद्री रास्ते हैं जिनमें होर्मुज की कोई जरुरत नहीं पड़ेगी।

पहला विकल्प है अमेरिका के पूर्वी तट और गल्फ कोस्ट के लिए। इसकेे लिए जामनगर, अरब सागर, हिंद महासागर, अफ्रीका के दक्षिण में केप ऑफ गुड होप, अटलांटिक महासागर होते हुए जहाज अमेरिका का पूर्वी तट या मेक्सिको की खाड़ी पहुंच जाएगा। यह स्वेज नहर और लाल सागर से बचने वाला एक संभावित समुद्री मार्ग है। जहाज को होर्मुज से गुजरने की आवश्यकता नहीं होती।

दूसरा विकल्प है स्वेज नहर के रास्ते से होकर। इसके लिए जामनगर से अरब सागर, बाब-अल-मंदेब, लाल सागर, स्वेज नहर, भूमध्य सागर, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य और अटलांटिक महासागर होते हुए जहाज अमेरिका पहुंच जाएगा। यह भी भौगोलिक रूप से संभव मार्ग है, लेकिन जहाज के आकार, नहर की सीमाओं, सुरक्षा और आर्थिक व्यवहार्यता के अनुसार इसका चयन होगा।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व क्या?

भारत के पास समुद्री रास्तों के कई विकल्प हैं। रूसी तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज से गुजरे बिना भारत आ सकता है। भारत में रिफाइनिंग के बाद पेट्रोलियम उत्पाद अमेरिका सहित दूसरे बाजारों में भेजे जा सकते हैं।

इससे तीन संभावित फायदे हैं। पहला है ऊर्जा सुरक्षा अर्थात भारत को विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीदने के विकल्प मिलते हैं। दूसरा है औद्योगिक लाभ अर्थात रिलायंस जैसी कंपनियां कच्चे तेल को अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलकर निर्यात कर सकती हैं। तीसरा है व्यापारिक अवसर अर्थात अमेरिका को तैयार ईंधन की आपूर्ति संभव है, बशर्ते कीमत, माल ढुलाई और कानूनी शर्तें अनुकूल हों।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।