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प्रतापगढ़ को एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी, तय हुई रूपरेखा

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अक्टूबर 31, 2026
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प्रतापगढ़ को एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी, तय हुई रूपरेखा

प्रतापगढ़, 31 अक्टूबर 2026। प्रतापगढ़ के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इस जिले को अब एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने जा रही है। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को विकसित कर उसे पर्यटन का केन्द्र बनाये जाने की भी रूपरेखा तैयार की गयी है।

इस पहल के अंतर्गत अकेले प्रतापगढ़ ही नहीं बल्कि प्रयागराज और चित्रकूट मंडल के आठ जिलों को शामिल किया गया है। प्रस्ताव है कि इन सभी आठ जिलों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानि एनसीआर की तर्ज पर विकसित किया जाये। इस कार्य के लिए अलग से प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण का गठन किया जाना प्रस्तावित है। यह आठ जिले इसी प्राधिकरण में शामिल होंगे। पहले इसमें छह जिलों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी थी, लेकिन अब प्रतापगढ़ और महोबा को भी प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने प्राधिकरण के गठन का मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन की मंजूरी के बाद इसके गठन की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

प्रस्तावित क्षेत्रीय प्राधिकरण में प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, कौशाम्बी, फतेहपुर, महोबा और प्रतापगढ़ शामिल होंगे। इस पूरे क्षेत्र के सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी प्रयागराज विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपी गई है। प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य आठों जिलों की भौगोलिक, आर्थिक और विकास संबंधी संभावनाओं को एक साझा योजना के तहत आगे बढ़ाना है।

प्रस्तावित प्राधिकरण के तहत आठों जिलों के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा। प्रयागराज, चित्रकूट सहित अन्य जिलों में मौजूद धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकेंगे।

कृषि और औद्योगिक विकास पर भी रहेगा जोर

क्षेत्रीय विकास की योजना केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगी। कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। आठों जिलों की स्थानीय जरूरतों और संसाधनों के आधार पर विकास की रूपरेखा तैयार होगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पीडीए के उपाध्यक्ष ऋषिराज के मुताबिक, प्राधिकरण का मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। गठन के बाद आठों जिलों की जरूरतों और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखकर विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना और सभी जिलों का संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।