रायपुर, 24 जुलाई 2025। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम) ने भारतीय कृषि में जैविक और अजैविक तनाव प्रबंधन पर एक विचार-मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में आईसीएआर-एनआईएएसएम, बारामती और भारतीय कृषि अर्थशास्त्र सोसायटी (आईएसएई), मुंबई ने सहयोग किया, जबकि नाबार्ड, रायपुर ने आंशिक समर्थन प्रदान किया। लगभग 70 वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया, जिन्होंने कीट, रोग, सूखा, लवणता और बाढ़ जैसे तनावों के प्रबंधन के लिए विज्ञान-आधारित नीति पत्र विकसित करने पर चर्चा की।
उद्घाटन सत्र में डॉ. एचसी शर्मा, पूर्व कुलपति, एचपीकेवी, पालमपुर ने जैविक तनाव प्रबंधन में नवाचार पर जोर दिया। डॉ. पीके चक्रवर्ती, पूर्व एडीजी (पीपीएंडबी) ने नीतिगत रणनीतियों पर विचार साझा किए। डॉ. पीके राय, निदेशक, एनआईबीएसएम, डॉ. के. सम्मी रेड्डी, निदेशक, एनआईएएसएम, डॉ. डीके मारोठिया, अध्यक्ष, आईएसएई, ज्ञानेंद्र मणि, सीजीएम, नाबार्ड और डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में तनाव प्रबंधन पर दो प्रकाशन जारी किए गए, जो नीतिगत संवाद को मजबूती प्रदान करते हैं।
चर्चा ने कृषि तनाव प्रबंधन के लिए भविष्य के अनुसंधान, निवेश और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की दिशा में ठोस आधार तैयार किया। यह नीति पत्र भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन और अन्य चुनौतियों से निपटने में मार्गदर्शन करेगा। सत्र का समापन डॉ. के. श्रीनिवास के धन्यवाद वक्तव्य के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन भारतीय कृषि में सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।













