रायपुर, 24 अगस्त 2025। नारायण सेवा संस्थान ने रविवार 24 अगस्त को 382 दिव्यांगों के जीवन में खुशी भर दी। यह ऐसे दिव्यांग हैं जिनके पैर नहीं हैं, जिसके चलते अपने पैरों से चल पाना मुश्किल है। परिवार के लोगों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वे इनके लिए कृत्रिम अंग उपलब्ध करा सकें। नारायण सेवा संस्थान ने ऐसे 382 दिव्यांगों को खोजा और उन्हें कृत्रिम अंग उपलब्ध कराये। अब वे अपने पैरों पर न केवल चल रहे हैं बल्कि दौड़ रहे हैं।
इस मौके पर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव भी उपस्थित रहे। उन्होंने संस्थान के कार्यों की सराहना की और कहा कि संस्थान ने यह कार्य करके अपने नाम की सार्थकता सिद्ध कर दिया। नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर ने रविवार को रायपुर के विशाल नगर स्थित शगुन फार्म में शिविर आयोजित किया। इस शिविर में 382 से अधिक दिव्यांगजनों को निशुल्क कृत्रिम अंग प्रदान किया गया।
विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबडा ने कहा कि धरती पर देवता उतर आए हैं जो किसी को नया हाथ, नया पैर दे रहे हैं। यह कितनी अद्भुत और महान सेवा है कि जो हाथ कभी लिख नहीं सकते थे, वे आज लिख सकेंगे; जो पैर चलना भूल चुके थे, वे अब फिर से डग भरेंगे।
शिविर की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। मंचासीन समाजसेवी ओपी निगम, संजय पारख, मीरा राव, डॉ अशोक भट्टड, सीताराम अग्रवाल,पंकज शर्मा व अनंत श्रीवास्तव सहित समस्त अतिथियों का स्वागत मेवाड़ी परंपरा से हुआ।
संस्थान के संरक्षक महेश अग्रवाल ने कहा कि रायपुर में अप्रैल में हुए चयन शिविर में 500 से अधिक दिव्यांगजन आए थे, जिनमें से 382 आज कृत्रिम अंग पाकर नया जीवन पा रहे हैं। यह केवल अंग नहीं, बल्कि उनकी रुकी हुई ज़िंदगी को आगे बढ़ाने की चाबी है।
उन्होंने कहा 45 सदस्यीय टीम ने जर्मन टेक्नोलॉजी से बने नारायण लिंब का फ़िटमेंट किया। डॉक्टरों ने न केवल अंग लगाए, बल्कि उनके उपयोग और देखरेख की प्रशिक्षण भी दी। समारोह के दौरान लाभांवित दिव्यांगों की परेड ने सभी की आंखें नम कर दीं और हृदय गर्व से भर गया। शिविर समारोह के अंत में आभार हरि प्रसाद लढ्ढा ने व्यक्त किया वहीं संचालन महिम जैन ने किया।
नारायण सेवा संस्थान का सफर 1985 से आरम्भ हुआ। संस्थापक कैलाश मानव को पद्मश्री और हाल ही में सामुदायिक सेवा एवं सामाजिक उत्थान सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल अपने मेडिकल, शिक्षा, कौशल विकास और खेल अकादमी के माध्यम से लाखों दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ चुके हैं। 2023 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।














