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जांबाज फ्लाइंग आफिसर रमाकांत तिवारी का निधन, त्रिवेणी संगम पर सैनिक सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

सेवानिवृत्त जांबाज फ्लाइंग आफिसर रमाकांत तिवारी का निधन, त्रिवेणी संगम पर सैनिक सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

प्रयागराज, 3 अक्टूबर 2025। भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त फ्लाइंग आफिसर रमाकांत तिवारी का 2 अक्टूबर को उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। प्रयागराज जिले के मेजा तहसील के अमिलिया खुर्द गांव के मूल निवासी रमाकांत तिवारी पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी समस्याओं के चलते अस्वस्थ थे। 3 अक्टूबर को सुबह 11 बजे त्रिवेणी संगम के किनारे झूसी के छतनाग घाट पर भारतीय वायु सेना के जवानों ने उन्हें पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।

रमाकांत तिवारी सात भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। वर्तमान में अपने परिवार के साथ प्रयागराज के झूसी में रह रहे थे। 1 अक्टूबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए लखनऊ ले जाया गया, जहां अगली सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी पार्थिव देह को 3 अक्टूबर को सम्मान के साथ झूसी लाया गया। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों, परिजनों, मित्रों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

छतनाग घाट पर वायु सेना के जवानों ने सलामी देकर उन्हें सैनिक सम्मान अर्पित किया, जिसने सभी के मन को भावुक कर दिया। रमाकांत तिवारी ने भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग आॅफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दीं और अपने कर्तव्यनिष्ठा व साहस के लिए जाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे अपने सरल और सहज स्वभाव के कारण क्षेत्र में सम्मानित थे।

सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें स्थानीय समुदाय में लोकप्रिय बनाया था। उनके निधन से पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। वे अपने पीछे 55 वर्षीय इकलौते पुत्र विनय कुमार तिवारी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की।

लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि रमाकांत तिवारी का जीवन प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनकी स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में लोगों ने उनके देशभक्ति और सामाजिक कार्यों को नमन किया। यह क्षति न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समुदाय के लिए अपूरणीय है।