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प्रतापगढ़ में सम्राट अशोक विजय दशमी उत्साहपूर्वक मनाई, बुद्ध विहार में धम्म चक्र अनुवर्तन दिवस और पालि पखवाड़ा संपन्न

प्रतापगढ़ में सम्राट अशोक विजय दशमी उत्साहपूर्वक मनाई, बुद्ध विहार में धम्म चक्र अनुवर्तन दिवस और पालि पखवाड़ा संपन्न

प्रतापगढ़, 4 अक्टूबर 2025। समन्वय उपासिका संघ के तत्वाधान में सई नदी के तट पर स्थित सुगतानन्द बुद्ध विहार में प्रियदर्शी सम्राट अशोक विजय दशमी का पर्व श्रद्धा, संकल्प और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पावन भिक्खु संघ की उपस्थिति में भोजन दान, संघदान, त्रिशरण, पंचशील, परित्राण पाठ, वृक्षारोपण और पालि भाषा संवर्धन सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पावन भिक्खु संघ का नेतृत्व कर रहे भिक्खु धम्मदीप ने अपने उद्बोधन में सम्राट अशोक के जीवन और उनके कलिंग युद्ध के बाद धम्म दीक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कलिंग युद्ध की विभीषिका ने सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन किया, जिसके बाद उन्होंने भगवान बुद्ध के अहिंसा, करुणा और मैत्री के सिद्धांतों को अपनाकर एक वैभवशाली राष्ट्र का निर्माण किया। भिक्खु धम्मदीप ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपनी गौरवशाली संस्कृति से जुड़ने और बुद्ध के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

उन्होंने विश्व शांति के लिए सम्राट अशोक के योगदान को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बताया, खासकर जब विश्व कई क्षेत्रों में युद्ध और हिंसा से जूझ रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बहन लीलावती ने कहा कि सम्राट अशोक ने भंते मोग्गिलिपुत्ततिष्य से धम्म की शिक्षा प्राप्त कर अपनी प्रजा का दिल बल या शस्त्र से नहीं, बल्कि करुणा, प्रेम और मैत्री के माध्यम से जीता। उन्होंने अशोक के धम्म आधारित शासन को एक आदर्श माना, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है। संचालन करते हुए राकेश कनौजिया ने सम्राट अशोक के जीवन से प्रेरणा लेते हुए कहा कि वर्तमान समय में पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्ध, जैसे इजरायल-फिलिस्तीन और रूस-यूक्रेन संघर्ष, युद्ध की निरर्थकता को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक का कलिंग युद्ध का अनुभव और उनके द्वारा अपनाया गया शांति का मार्ग आज भी विश्व शांति के लिए प्रासंगिक है। कार्यक्रम से पूर्व, पावन भिक्खु संघ का आंबेडकर चौराहे पर उपासक वेद प्रकाश, सुशील कुमार “दद्दू” और सुरेन्द्र विमल के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद भिक्खु संघ ने नगर के मुख्य मार्गों से शांति, करुणा और मैत्री का संदेश देते हुए घंटाघर चौक होते हुए सुगतानन्द बुद्ध विहार तक पदयात्रा की।

इस दौरान समन्वय सेवा संस्थान और उपासिका संघ द्वारा आयोजित भोजन दान, संघदान और धम्म देशना का आयोजन हुआ, जिसमें भिक्खु संघ ने मंगल मैत्री का संदेश दिया। 2 अक्टूबर को वन विभाग के सहयोग से बुद्ध विहार परिसर में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। सुरेन्द्र कुमार विमल ने बताया कि 14 अक्टूबर 1956 को विजयादशमी के दिन डॉ. भीम राव आंबेडकर ने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाकर इस गौरवशाली संस्कृति को पुनर्स्थापित किया था। इसलिए इस दिन को धम्म चक्र अनुवर्तन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।इस अवसर पर 17 सितंबर को आनागरिक धम्मपाल जयंती से शुरू हुए पालि पखवाड़ा का समापन भी किया गया।

पालि भाषा में नेट परीक्षा में सफल अभिनेष सरोज और पालि भाषा संवर्धन में विशिष्ट योगदान के लिए आचार्य डॉ. शिव मूर्ति लाल मौर्य, आचार्य सुमन चंद्रा, अभिनेष सरोज और बसंत लाल मौर्य को सम्मानित किया गया। आचार्य सुभाष चंद्रा ने पालि प्रबोधन और सुत्त संगायन के माध्यम से पालि पखवाड़े का समापन किया।आभार उपासिका अंजनी अवधेश और अनीता बौद्ध ने संयुक्त रूप से व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्रीराम उमर वैश्य, इंजीनियर श्वेता प्रभात, इंजीनियर राम अचल मौर्य, उदयवीर सिंह, शोभा कनौजिया, शशि विमल, डॉ. विजय निर्मला सरोज, संजय रंजू बौद्ध, रामप्यारी, सरिता कुमारी, पुष्पा परी, मकदूम, सुनीता, मंजू राकेश, राम लल्ली मौर्य, वेद प्रकाश, खुशबू यादव, अंजलि, पन्ना लाल, सुदामा, हरिकेश बौद्ध, जीतेन्द्र यादव, पारुल, विशाल बौद्ध, ज्ञानेश मौर्य, लक्ष्मी, मधुबाला, अशोक उमा, उमेश चंद्र, दिनेश, संतोष शशि, एस.पी. सिंह लोहिया, ललितमित्रा, शाश्वत विमल, सुशील कुमार “दद्दू”, राम सजीवन सरोज, राम लखन, विजय शंकर, आरवि, प्रियांशु, संजय दीपशिखा, मखदूम प्रसाद, राज किशोर विमल, पुष्पा, माया लता, आरती, दुर्गावती, खुशबू, प्रमोद प्रखर, वीनू मौर्य, ज्ञानेश्वर सिंह, देवंशी, ईस्वी, मंजू, आचार्य राजीव अनीता, नंदलाल, कमलेश, शिवम् यादव, अनुराग भारतीय, रामबरन, उदयराज, राकेश, संतलाल, राजेन्द्र कुमार बौद्ध सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इस आयोजन ने न केवल सम्राट अशोक के धम्म आधारित जीवन को याद किया, बल्कि बौद्ध धर्म की शिक्षाओं, पर्यावरण संरक्षण और पालि भाषा के प्रचार-प्रसार को भी बढ़ावा दिया। यह कार्यक्रम स्थानीय समुदाय में शांति, करुणा और मैत्री के संदेश को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।