लखनऊ, 29 दिसम्बर 2025। जब ठिठुरती रातों में सड़कों पर बैठे हाथ मदद को तरसते हैं, तब मानवता की गर्माहट ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। इसी भावना को साकार करते हुए ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति ने “सेवा परमो धर्म” का संदेश देते हुए जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कर इंसानियत की मिसाल पेश की। इस सेवा कार्य की अगुआई सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने की, जिनका मानना है कि सच्चा धर्म वही है, जो पीड़ित मानव तक पहुंचे।
अत्यधिक ठंड के बीच समिति द्वारा न सिर्फ गरीब और असहाय लोगों को कंबल दिए गए, बल्कि उन मातृशक्तियों का भी सम्मान किया गया, जो धर्म, संस्कृति और सेवा के कार्यों में निस्वार्थ भाव से लगी हैं। उन्हें “जय श्री राम” की छवि अंकित विशेष सिन्दूरी शॉल अंगवस्त्र के रूप में भेंट की गई। यह सम्मान वस्त्र नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक था।
हर वर्ष 21 दिसम्बर को सपना गोयल के जन्मदिवस के अवसर पर “सेवा पखवाड़ा” आयोजित किया जाता है। इसके तहत लखनऊ के पारा, जानकीपुरम सहित आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों में भी जरूरतमंदों को ठंड से बचाने के लिए कंबल वितरित किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर सुंदरकांड का सस्वर पाठ भी किया गया, जिससे सेवा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आगामी कार्यक्रमों के तहत 1 जनवरी 2026 को अंसल बरौना और पारा क्षेत्र में, संक्रांति पर किसान पथ के गांवों में तथा 4 जनवरी को गोंडा में कंबल वितरण किया जाएगा।
सपना गोयल ने नववर्ष के संदेश में बताया कि भारतीय नववर्ष 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 के रूप में आरंभ होगा। उन्होंने अपील की कि हम भारतीय संस्कृति के अनुरूप नववर्ष को श्रद्धा और सेवा भाव से मनाएं। उनका लक्ष्य है कि संतों-ऋषियों की भूमि भारत पुनः “विश्व गुरु” बने।
बिना किसी सरकारी या निजी अनुदान के, समिति द्वारा प्रतिदिन और साप्ताहिक सामूहिक सुंदरकांड पाठ, देशभर के तीर्थ स्थलों पर आयोजन और हजारों मातृशक्तियों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जब सेवा, संस्कार और समर्पण एक साथ चलते हैं, तो मानवता स्वयं धर्म बन जाती है।














