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पकौड़ी बेचने वाले की बेटी दीपेश कुमारी बनी कलेक्टर

पकौड़ी बेचने वाले की बेटी दीपेश कुमारी बनी कलेक्टर

नई दिल्ली, 22 जून 2025। दीपेश कुमारी, जो राजस्थान के भरतपुर जिले की रहने वाली हैं, की सफलता की कहानी गरीब से लेकर गर्व की मंजिल तक पहुंचने का एक जीवंत उदाहरण है। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी दीपेश के पिता, गोविंद प्रसाद, पिछले 25 वर्षों से चाट-पकौड़ी और भजिया का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं।

आर्थिक तंगी के बावजूद, गोविंद ने अपने बच्चों को शिक्षा का महत्व सिखाया और उन्हें पढ़ाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। इस मेहनत का फल तब मिला जब दीपेश ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में दूसरी कोशिश में AIR 93 हासिल कर IAS अधिकारी बनीं।

दीपेश की शैक्षणिक यात्रा भी प्रेरणा से भरी है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भरतपुर के शिशु आदर्श विद्या मंदिर से पूरी की, जहां 10वीं में 98% और 12वीं में 89% अंक प्राप्त किए। इसके बाद जोधपुर के एक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने IIT बॉम्बे से M.Tech की डिग्री हासिल की।

पढ़ाई के दौरान स्कॉलरशिप ने उनकी आर्थिक मदद की, और कुछ समय के लिए उन्होंने एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी की। लेकिन उनका असली सपना सिविल सेवा में जाना था, जिसे उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया।

दीपेश की सफलता ने न केवल उनके परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल कायम की। उनके पिता गोविंद प्रसाद कहते हैं, मेहनत और लगन से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। दीपेश ने यह साबित कर दिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और मेहनत से सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।

आज वे अपने माता-पिता और भाई-बहनों के लिए गर्व का विषय हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सही दिशा और मेहनत से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, चाहे शुरूआत कितनी ही छोटी क्यों न हो।