प्रतापगढ़ जिले की कुंडा तहसील एक बार फिर अफसरों की मनमानी को लेकर चर्चा में आ गयी। शनिवार 19 सितंबर 2026 को मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम ने कुंडा तहसील का निरीक्षण किया और लापरवाह मिले लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक के खिलाफ ऐक्शन लिया।
प्रमुख बिंदु
- संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर मंडलायुक्त ने कुंडा तहसील का औचक निरीक्षण कर फरियादियों की समस्याएं सुनीं। मौके पर प्रकरणों के निस्तारण हेतु लेखपालों की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अनुपस्थिति का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी प्रतापगढ़ ने उपजिलाधिकारी कुंडा को लेखपाल एसोसिएशन के महामंत्री एवं मंत्री के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
- संपूर्ण समाधान दिवस में अनुपस्थित पाए गए 11 विभागीय अधिकारियों का भी मंडलायुक्त ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
- तहसील दिवस के निस्तारण रजिस्टरों में अनियमितता, अपूर्ण/अविश्वसनीय आख्या एवं पंजीकरण रसीदों में खामियां मिलने पर संबंधित माल बाबू के विरुद्ध एडवर्स एंट्री एवं विभागीय कारर्वाई तथा सभी रजिस्टरों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही, धारा 34 के 90 दिवस से अधिक पुराने 1,000 से अधिक वाद लंबित पाए जाने पर तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक एवं तीनों नायब तहसीलदारों का लंबित वादों के पूर्ण निस्तारण तक वेतन रोकने के निर्देश दिए गए।
प्रतापगढ़, 19 सितंबर 2026। संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार 19 सितंबर 2026 को मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने अपर आयुक्त त्रिभुवन एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ जनपद प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तहसील में आए फरियादियों से उनकी समस्याओं की जानकारी प्राप्त की तथा संबंधित अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान प्रकरणों के निस्तारण हेतु लेखपाल अनुपस्थित पाए गए। अवगत कराया गया कि लेखपालों एवं अधिवक्ताओं के मध्य हाल ही में हुए विवाद के कारण लेखपाल सुनवाई कक्ष में नहीं जा रहे हैं। इस स्थिति पर मंडलायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की तथा फरियादियों को अपने प्रकरणों के निस्तारण के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। लेखपालों की अनुपस्थिति का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी प्रतापगढ़ ने उपजिलाधिकारी कुंडा को लेखपाल एसोसिएशन के महामंत्री एवं मंत्री के विरुद्ध निलंबन की कारर्वाई करने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान अनुपस्थित पाए गए 11 विभागीय अधिकारियों का भी कड़ा संज्ञान लिया तथा सभी अनुपस्थित अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस शासन की महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसमें संबंधित विभागीय अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए फरियादियों की समस्याओं का प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण किया जाना आवश्यक है।
इसी क्रम में मंडलायुक्त ने जुलाई एवं अगस्त माह में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवसों से संबंधित निस्तारण रजिस्टरों का भी अवलोकन किया। रजिस्टरों में शिकायतों के निस्तारण के संबंध में अंकित आख्या में अनियमितताएं एवं अपूणर्ता पाई गई। प्रथम दृष्टया कई मामलों में मौके पर वास्तविक स्थिति का परीक्षण किए बिना ही आख्या अंकित किया जाना प्रतीत हुआ। पंजीकरण रसीदों में भी अनियमितता पाई गई तथा विभिन्न प्रकरणों में एक ही क्रमांक की रसीद अंकित मिली। इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने पर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जा सका। मंडलायुक्त ने रजिस्टरों के रख-रखाव में लापरवाही पर संबंधित माल बाबू के विरुद्ध एडवर्स एंट्री एवं विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए तथा सभी रजिस्टरों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
इसके पश्चात धारा 33 एवं 34 के अंतर्गत लंबित वादों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान धारा 34 के 90 दिवस से अधिक पुराने 1,000 से अधिक वाद लंबित पाए गए। लंबित वादों के संबंध में उपस्थित तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक एवं तीनों नायब तहसीलदारों द्वारा संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इस पर मंडलायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक एवं तीनों नायब तहसीलदारों का लंबित वादों की पेंडेंसी शून्य होने तक वेतन रोकने के निर्देश दिए।
अंत में मंडलायुक्त ने उपजिलाधिकारी कुंडा को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देशित किया कि तहसील दिवस से संबंधित सभी रजिस्टरों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए तथा प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तहसील स्तर पर अभिलेखों के रख-रखाव, अधिकारियों की उपस्थिति तथा राजस्व वादों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
