Highlights
- सौर गठबंधन से लेकर कार्बन मार्केट तक पर रहेगा फोकस
- अंताल्या सम्मेलन में भारत की जलवायु पहलों के लिए होंगे विशेष साइडलाइन कार्यक्रम
- 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि पुनर्स्थापन के लक्ष्य में 21.76 मिलियन हेक्टेयर पर हो चुका है काम
नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए भारत अब अपनी नीतियों और पहलों को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से प्रस्तुत करने की तैयारी में है। तुर्किये के अंताल्या में होने वाले कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज (कॉप) सम्मेलन में भारत जस्ट ट्रांजिशन, नई तकनीक और कार्बन मार्केट के साथ अपनी विभिन्न जलवायु पहलों को भी दुनिया के सामने रखेगा।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि सम्मेलन के दौरान भारत की जलवायु कार्रवाई से जुड़े कार्यक्रमों के लिए विशेष साइडलाइन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और लीडरशिप फॉर इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन जैसी पहलें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चला रहा है। अंताल्या सम्मेलन में इन पहलों के जरिए भारत अपने प्रयासों और अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत करेगा।
भूमि पुनर्स्थापन में भारत की प्रगति
भूपेंद्र यादव ने मरुस्थलीकरण से जुड़े वैश्विक प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत ने 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि के पुनर्स्थापन का लक्ष्य तय किया है। इसमें से अब तक 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि के पुनर्स्थापन की दिशा में काम किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि मरुस्थलीकरण से संबंधित कॉप में भूमि पुनर्स्थापन को सबसे महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया था। भारत इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।
जैव विविधता के 23 वैश्विक लक्ष्यों पर काम
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आर्मेनिया में जैव विविधता कॉप और मंगोलिया में मरुस्थलीकरण कॉप आयोजित हो चुके हैं। जैव विविधता के क्षेत्र में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के तहत निर्धारित 23 लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने अमृत सरोवर योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों के माध्यम से भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए गए हैं।
जलवायु कार्रवाई में भारत की पहलें होंगी केंद्र में
अंताल्या सम्मेलन में भारत का फोकस केवल जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियां रखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपने संस्थागत कार्यक्रमों और समाधानों को भी सामने लाने पर होगा। सौर ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे और औद्योगिक बदलाव से जुड़ी पहलों के माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जलवायु कार्रवाई में अपनी भूमिका प्रस्तुत करेगा।

