गुवाहाटी, 21 दिसंबर 2025। अडानी ग्रुप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया, फॉर मेड इन इंडिया’ अभियान को साकार करते हुए देश को एक नई और ऐतिहासिक सौगात दी है। असम की राजधानी गुवाहाटी में लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 का निर्माण स्वदेशी बांस से कर देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट टर्मिनल तैयार किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 दिसंबर को इस अत्याधुनिक टर्मिनल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्वा सरमा भी उपस्थित रहे।
यह टर्मिनल न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत की संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों का भी प्रतीक है। निर्माण में लगभग 140 टन स्थानीय बांस का उपयोग किया गया है, जो असम और पूरे नॉर्थईस्ट क्षेत्र की पहचान है। बांस से बना यह टर्मिनल पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में एक मिसाल पेश करता है।
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ उद्घाटन समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए इसे असम के लोगों को समर्पित बताया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के उद्घाटन अवसर पर होस्ट करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि यह टर्मिनल असम के लोगों का है और स्थानीय बांस से बना यह ढांचा “स्काई फॉरेस्ट” की अवधारणा के चारों ओर डिज़ाइन किया गया है।
गौतम अडानी के अनुसार, यह टर्मिनल नॉर्थईस्ट की कारीगरी, पारिस्थितिकी और शांत शक्ति को एक विश्वस्तरीय गेटवे में बदलता है। यह एयरपोर्ट टर्मिनल युवाओं, उद्यमियों, किसानों और परिवारों को न केवल देश के अन्य हिस्सों से, बल्कि पूरी दुनिया से जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता विश्वा सरमा के नेतृत्व और समर्थन के लिए भी आभार जताया।
मुख्यमंत्री हिमंता विश्वा सरमा ने इस अवसर पर कहा कि यह टर्मिनल असम के विकास और उत्तर-पूर्व की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी संसाधनों से बना यह एयरपोर्ट टर्मिनल स्थानीय कारीगरों और किसानों के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन के दौरान कहा कि गुवाहाटी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल आत्मनिर्भर भारत की भावना को दर्शाता है। उन्होंने इसे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की परंपरा, विरासत और आधुनिक तकनीक जब एक साथ आती हैं, तो भारत विश्व मंच पर एक नई पहचान बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टर्मिनल न केवल यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाएगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और निवेश के लिहाज से भी उत्तर-पूर्व भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। स्वदेशी बांस से बने इस पहले एयरपोर्ट टर्मिनल ने भारत की निर्माण क्षमता और पर्यावरणीय सोच को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत संदेश दिया है।

















