Highlights
- आपात जरूरत में अब मिनटों में मदद
- साहूकारों और महंगे कर्ज ऐप्स पर निर्भरता घटी
- दूरस्थ जिलों और कम वेतन वाले कर्मचारियों तक पहुंची राहत
रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। ई-कोष पोर्टल आपात जरूरत में अब मिनटों में मदद कर रहा है। यह पोर्टल छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों को भरोसा बन गया है। इलाज का अचानक खर्च हो, बच्चों की फीस हो या फिर कोई पारिवारिक दायित्व, अब छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों को निजी साहूकारों या ऊंचे ब्याज वाले ऐप्स के दरवाजे नहीं खटखटाने पड़ रहे। राज्य सरकार की वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना के तहत कर्मचारी ई-कोष पोर्टल से कुछ ही मिनटों में अग्रिम वेतन या ऋण सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर रहे हैं।
ई-कोष से जुड़ी पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था
- राज्य मंत्रिपरिषद ने 30 सितंबर 2025 को योजना को मंजूरी दी और 16 मार्च 2026 से यह पूरे प्रदेश में लागू हुई।
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 8 जुलाई 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में ई-कोष पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया।
- योजना के दो हिस्से हैं। अर्जित वेतन की अग्रिम निकासी पर कोई ब्याज या शुल्क नहीं लगता।
- बड़ी जरूरतों के लिए वेतन आधारित ऋण उपलब्ध है, जिस पर न प्रोसेसिंग शुल्क है और न समय से पहले चुकाने का शुल्क।
- ऋण की पूरी प्रक्रिया भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत संचालित होती है।
- हर लेनदेन से पहले कर्मचारी को की फैक्ट स्टेटमेंट मिलता है, जिसमें ब्याज और सभी शर्तें स्पष्ट रूप से दी जाती हैं।
शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा था कि अब कर्मचारियों को आकस्मिक जरूरतों के लिए साहूकारों या ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ेगी, और इस व्यवस्था से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा।
ई-कोष की लोकप्रियता के आंकड़ें
- छह महीने में 34 हजार से अधिक कर्मचारियों को सहारा मिला।
- सितंबर 2026 तक प्रदेश के 97 हजार कर्मचारी ई-कोष पोर्टल योजना में पंजीयन करा चुके हैं।
- 34 हजार कर्मचारी इसका लाभ उठा चुके हैं।
योजना कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों पर खरी उतरी है। 58% ऋण कर्मचारी के एक माह के वेतन से अधिक राशि के हैं, यानी यह सुविधा केवल छोटे-मोटे खर्चों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़ी आकस्मिक जरूरतों में भी काम आ रही है। जिन कर्मचारियों ने अपने पैसों से समय से पहले ऋण चुकाया, उनमें से लगभग आधे दोबारा इस सुविधा पर लौटे, जो योजना पर बढ़ते भरोसे का संकेत है।
54% आवेदन तब आए जब बैंक शाखाएं बंद थीं, फिर भी आधे मामलों में राशि 5 मिनट के भीतर और 99% मामलों में उसी दिन खाते में पहुंची।
कर्मचारियों की जुबानी ई-कोष की कहानी
वित्त विभाग को भेजे गए आभार पत्रों में कई कर्मचारियों ने इस सुविधा को वित्तीय संजीवनी बताया है। शासकीय माध्यमिक शाला बेलोरा के शिक्षक तोमेंद्र कुमार साहू लिखते हैं, आवश्यकता पड़ने पर समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त होने से मुझे किसी निजी ऋणदाता या अधिक ब्याज वाले विकल्प का सहारा नहीं लेना पड़ा। वे कहते हैं कि आवेदन से लेकर राशि मिलने तक पूरी प्रक्रिया सहज और तेज थी।
पुलिस विभाग के सोमनाथ ध्रुव के अनुसार, यह सुविधा केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि कर्मचारियों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रतीक है। उनका कहना है कि पहली बार उपयोग के बाद बना भरोसा आज और मजबूत हो चुका है।
कम समय में हजारों कर्मचारियों तक पहुंचकर यह योजना साबित कर चुकी है कि सही व्यवस्था हो तो आपात जरूरत में मदद तेज, सम्मानजनक और भरोसेमंद हो सकती है। वेतन से जुड़ी यह सुविधा प्रदेश के शासकीय सेवकों को आर्थिक सुरक्षा दे रही है और उन्हें साहूकारों व महंगे कर्ज से दूर रख रही है।
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