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ट्रंप ने बनाया शांति बोर्ड

ट्रंप ने बनाया शांति बोर्ड, सदस्यता शुल्क 1 अरब डॉलर

दावोस, 23 जनवरी 2026। दावोस में चल रहे इॅकानमिक फोरम की बैठक में पहुंचे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति बोर्ड की घोषणा की। इस बोर्ड में सदस्य बनने वाले देश को 1 अरब डॉलर सदस्यता शुल्क के रुप में देना होगा।

श्री ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि उनका यह नया बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करे। श्री ट्रंप के सहयोगी अर्जेंटीना और हंगरी सहित 19 देशों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों का एक समूह श्री ट्रम्प के साथ मंच पर एकत्र हुआ और उन्होंने संस्था के संस्थापक चार्टर पर अपने हस्ताक्षर किए।

मूल रूप से हमास और इज़राइल के बीच युद्ध के बाद गाजा में शांति की देखरेख के लिए गठित इस बोर्ड के चार्टर में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में एक व्यापक भूमिका की परिकल्पना की गई है। इससे यह चिंता पैदा हो गई है कि श्री ट्रंप इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

शांति बोर्ड की संभावित सदस्यता विवादास्पद हो गयी है, क्योंकि ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बोर्ड का सदस्य बनने के लिए आमंत्रित किया है। पुतिन ने ही चार साल पहले यूक्रेन पर आक्रमण किया था और युद्ध अभी भी जारी है।

ट्रंप ने कहा कि श्री पुतिन इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो गए हैं, जबकि रूसी नेता ने कहा कि वह अभी भी निमंत्रण का अध्ययन कर रहे हैं।

स्थायी सदस्यों को शामिल होने के लिए 1 अरब डॉलर का भुगतान भी करना होगा। इसकी भी आलोचना हो रही है।

ब्रिटेन और फ्रांस ने किया किनारा

फ्रांस और ब्रिटेन ने इस बोर्ड में शामिल होने से किनारा कर लिया है। यह दोनों देश समारोह में भी शामिल नहीं हुए। मंच पर मौजूद सदस्यों में से अधिकांश के ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इनमें हंगरी के विक्टर ओर्बन और अर्जेंटीना के जेवियर मिलेई शामिल रहे।

बहरीन, मोरक्को, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पैराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और मंगोलिया के अधिकारियों ने भी इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी वहां मौजूद नहीं थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समारोह में कहा कि बोर्ड का मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि गाजा में यह शांति समझौता स्थायी हो जाए।