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रूबल नागी ने जीता ग्लोबल टीचर प्राइज

रूबल नागी ने जीता ग्लोबल टीचर प्राइज अवॉर्ड

नई दिल्ली, 6 फरवरी 2026। भारत की शिक्षिका रूबल नागी की चर्चा दुनिया भर में शिक्षा जगत में है। रूबल नागी ने ग्लोबल टीचर प्राइज अवॉर्ड 2026 अपने नाम किया है। यह सम्मान उन्हें दुबई में हुए वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में दिया गया। अवॉर्ड में रूबल को 10 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गयी। इस पुरस्कार को GEMS Education ने अपने 10वें संस्करण में प्रस्तुत किया गया। यह सम्मान दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने रूबल नागी को प्रदान किया।

भारतीय शिक्षिका रूबल नागी को यह पुरस्कार उनके द्वारा किये गये नवाचार के लिए दिया गया है। उन्होंने उपेक्षित दीवारों को इंटरैक्टिव शैक्षिक भित्ति चित्रों में बदलकर बच्चों को पढ़ने के लिए रुचिकर बनाया। यह भित्ति चित्र पढ़ने, लिखने, अंकगणित के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता भी सिखाते हैं।

रूबल नागी ने 10 लाख बच्चों को स्कूल से जोड़ा

  • 20 वर्षों में रूबल नागी ने कला को पढ़ाई का जरिया बनाकर 10 लाख से ज्यादा बच्चों को स्कूल से जोड़ने में मदद की।
  • नागी को 139 देशों से आए 5,000 से ज्यादा नामांकनों में से चुना गया।
  • रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन के जरिए उन्होंने पूरे भारत में 800 से अधिक शिक्षा केंद्र खोले हैं।
  • ये केंद्र 100 से ज्यादा गरीब समुदायों और गांवों में बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेरणादायक जगह बनाते हैं।
  • ये केंद्र उन बच्चों को मदद करते हैं जो स्कूल से बाहर हैं।
  • उन्हें शिक्षा में वापस लाने, पढ़ाई में सहारा देने, मनोसामाजिक मदद और रचनात्मक गतिविधियाां देने में सहायता मिलती है।

दीवारों के जरिए शिक्षा में क्रांति

रूबल नागी की शिक्षण पद्धति का मुख्य आधार ‘सीखने की जीवंत दीवारें’ है। इसमें परित्यक्त दीवारों को खुली कक्षाओं में बदलकर बच्चों के लिए सीखने का वातावरण बनाया जाता है।

नागी पूरे भारत में घूमती हैं, शिक्षकों को मार्गदर्शन देती हैं और बच्चों के साथ सीधे काम करती हैं। उन्होंने 600 से अधिक शिक्षकों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया है, जिससे एक ऐसा मॉडल तैयार हुआ है जिसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है और जो बच्चों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को पूरा करता है।

उनके कार्यक्रमों से स्कूल छोड़ने की दर में 50% से ज्यादा कमी आई है। बच्चों के लंबे समय तक पढ़ाई में बने रहने में जरूरी सुधार किया है।

रूबल नागी की शिक्षण पद्धति का मुख्य आधार ‘सीखने की जीवंत दीवारें’ हैं। इसमें परित्यक्त दीवारों को खुली कक्षाओं में बदलकर बच्चों के लिए सीखने का वातावरण तैयार किया जाता है।

पुरस्कार राशि से खोलेंगी व्यावसायिक संस्थान

रूबल नागी ने कहा कि पुरस्कार राशि का उपयोग ऐसे व्यावसायिक संस्थान की स्थापना में किया जाएगा, जो व्यावसायिक कौशल और डिजिटल साक्षरता में मुफ्त प्रशिक्षण देगा। इसका उद्देश्य है लाखों वंचित युवाओं के लिए जीवन के अवसर बदलना।