प्रतापगढ़, 29 सितंबर 2026। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीमैप की शोधार्थी वाग्मी सिंह ने विज्ञान और नवाचार के जरिए सतत कृषि की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने फसल रोगों के प्रबंधन और कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए पीजीपीआर- आधारित बीज बायोप्राइमिंग उपकरण नामक तकनीक विकसित की है, जिससे पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा
कृषि पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले मानधाता बाजार निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख स्व.डॉ. दिनेश प्रताप सिंह की पौत्री वाग्मी सिंह मीनाक्षी सिंह व वीरेंद्र कुमार सिंह की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि और वैज्ञानिक यात्रा में 22 सितंबर 2026 को विकसित यह तकनीक सूक्ष्मजीवों (पीजीपीआर) के माध्यम से बीजों की गुणवत्ता और फसल स्वास्थ्य में सुधार करती है। वाग्मी के नाम 14 शोध पत्र, 2 पेटेंट और तीन औषधीय व सगंध पौध किस्में (सिम-सुरस, सिम-इंदुश्री, सिम-रोही गोल्ड) विकसित करने का श्रेय दर्ज है।
जर्मनी के बर्लिन में आयोजित चौथे ग्लोबल समिट ऑन अर्थ साइंस एंड क्लाइमेट चेंज’ में आमंत्रित वक्ता के रूप में शोध प्रस्तुत करने के अलावा, उन्हें ‘यंग साइंटिस्ट ऑफ द ईयर’ (एन.इ.एस.ए.) और ‘यंग माइक्रोबायोलॉजिस्ट’ जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वाग्मी सिंह की इस सफलता पर उनके मामा विक्रांत सिंह नवीन ने कहा कि यह परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव के साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में कदम बढ़ाने वाले युवाओं और बेटियों के लिए भी एक बड़ा प्रेरणा श्रोत है।
