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सरिता द्विवेदी, बिना हाथों की पैरा एथलीट ने बोसिया में रोशन किया भारत का नाम

सरिता द्विवेदी, बिना हाथों की पैरा एथलीट ने बोसिया में रोशन किया भारत का नाम

नई दिल्ली, 22 जून 2025। सरिता द्विवेदी, एक ऐसी भारतीय पैरा-एथलीट जिन्होंने शारीरिक अक्षमता को अपनी ताकत बनाकर बोसिया खेल में देश का नाम रोशन किया। चार साल की उम्र में एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ और एक पैर खोने के बावजूद, सरिता ने हार नहीं मानी। उनकी दृढ़ता और जुनून ने उन्हें बोसिया, एक पैरालंपिक खेल, में भारत की उभरती सितारा बना दिया। यह खेल गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले एथलीटों के लिए है, जिसमें रणनीति और मानसिक कौशल की जरूरत होती है।

2024 में काहिरा, मिस्र में आयोजित वर्ल्ड बोसिया चैलेंजर में सरिता ने दो कांस्य पदक जीते, जो भारत के लिए गर्व की बात है। ये पदक व्यक्तिगत और संभवतः जोड़ी इवेंट में आए। इसके अलावा, फरवरी 2024 में 8वीं बोसिया नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। 2025 की बोसिया नेशनल चैंपियनशिप में भी सरिता ने सचिन चमरिया के साथ जोड़ी बनाकर रजत पदक जीता। जनवरी 2024 में उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीता।

गोवा की रहने वाली सरिता, ALIMCO से जुड़ी हैं और अपनी मेहनत से बोसिया में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उनके खेल में गेंद को सटीकता से निशाने तक पहुंचाने की कला दर्शाती है कि मानसिक शक्ति और अभ्यास किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। सरिता की कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, खासकर उन युवाओं के लिए जो जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

उनकी उपलब्धियां न केवल खेल जगत में, बल्कि समाज में भी समावेशिता और साहस का संदेश देती हैं। सरिता का सपना है कि वह भारत के लिए पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतें, और उनकी मेहनत देखकर यह सपना जल्द सच हो सकता है।