प्रतापगढ़, 7 जुलाई 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बहुचरा ग्राम की बहू डॉ. अंजना सिंह सेंगर, जो सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं, के गजल संग्रह यादों की रियासत का लोकार्पण मॉरीशस गणराज्य के राष्ट्रपति धरमवीर गोकुल जीसीएसके द्वारा विश्व संगीत दिवस के अवसर पर विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस में किया गया।
इस भव्य समारोह में भारत के उप उच्चायुक्त विमर्श आर्यन, विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव डॉ. माधुरी रामधारी, उप महासचिव डॉ. शुभंकर मिश्र, आर्य नेता उदय नारायण गंगू, मॉरीशस सरकार के कई मंत्री, अधिकारीगण, और अमेरिका, तंजानिया, यूएई, भारत सहित विभिन्न देशों के साहित्यकार और लेखक उपस्थित रहे। यह आयोजन हिंदी साहित्य के वैश्विक प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक एकता का एक शानदार उदाहरण बना।
लोकार्पण समारोह में मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमवीर गोकुल, जो स्वयं साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं, ने डॉ. अंजना की गजलों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, डॉ. अंजना की गजलें उत्कृष्ट हैं और इनमें मन को सुकून देने वाली गहराई है। इन्हें और आगे ले जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने यादों की रियासत को पढ़ने के बाद इसकी संवेदनशीलता और साहित्यिक गुणवत्ता की सराहना की और विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव डॉ. माधुरी रामधारी को गजल लेखन पर कायर्शाला आयोजित करने का सुझाव भी दिया। इस सुझाव से यह स्पष्ट है कि डॉ. अंजना की रचनाएं न केवल साहित्यिक मंचों पर प्रभाव छोड़ रही हैं, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरित करने की क्षमता भी रखती हैं।
डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने समारोह में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विदेशों में हिंदी साहित्य के प्रति लोगों का लगाव अद्भुत है। उन्होंने बताया, मॉरीशस, दुबई, फ्रांस, मलेशिया, इंडोनेशिया, म्यांमार जैसे देशों में साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अनुभव मुझे मिला है। वहां भारत और हिंदी के प्रति जो समर्पण और प्रेम है, वह हृदयस्पर्शी है।
उन्होंने छंदबद्ध रचनाओं के प्रति अपनी विशेष रुचि को रेखांकित करते हुए कहा कि छंदबद्ध लेखन में समय और एकाग्रता की आवश्यकता होती है, लेकिन आधुनिक साहित्यकार सरल विधाओं की ओर अधिक झुक रहे हैं। इससे छंदबद्ध रचनाओं का खजाना लुप्त होने की कगार पर है। उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि वे छंदबद्ध रचनाओं की महत्ता को समझें और हिंदी भाषा को अपने हृदय में संजोएं।
डॉ. अंजना ने केंद्र सरकार की सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर साहित्य और सामाजिक कार्यों को समर्पित जीवन चुना। उनकी सात पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें मन के पंख, जुगनू की जंग, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर लिखी गई जनमानस के महाराज, सीता माता पर आधारित खंड काव्य विदग्ध वनदेवी, यादों की रियासत, अगर तुम मुझसे कह देते, और अन्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कई शोध पत्र लिखे और संपादित किए हैं।
उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें देश-विदेश में 60 से अधिक सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठित फिराक गोरखपुरी सम्मान और 8वां एशियाई साहित्यिक उत्कृष्टता पुरस्कार शामिल हैं।
जलौन की बेटी हैं डॉ. अंजना
डॉ. अंजना की यात्रा प्रेरणादायी है। उत्तर प्रदेश के जलौन जिले के लितावली गांव में 15 जुलाई 1970 को जन्मीं अंजना ने सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में अनुशासन, सेवा और देशभक्ति के मूल्य आत्मसात किए। ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। साहित्य के साथ-साथ, उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने चंद्रा एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, सँस्कार ग्लोबल स्कूल की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त किया है। प्रतापगढ़ में सँस्कार हॉस्पिटल की स्थापना और आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता जैसे उनके सामाजिक कार्य उनकी संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।
डॉ. अंजना ने अपने संबोधन में कहा, हिंदी गजलें संवेदनाओं का समुद्र हैं, जो समय के साथ और विस्तार पाएंगी। उनकी यह रचना न केवल भावनाओं को शब्दों में पिरोती है, बल्कि हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को भी आगे बढ़ाती है। इस समारोह में उपस्थित साहित्यकारों और गणमान्य व्यक्तियों ने डॉ. अंजना की रचनात्मकता और उनके सामाजिक योगदान की सराहना की।














