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लिपिक संवर्ग प्रशिक्षण से प्रशासनिक कार्यों को मिली नई दिशा

लिपिक संवर्ग प्रशिक्षण से प्रशासनिक कार्यों को मिली नई दिशा

वाराणसी, 13 दिसंबर 2025। लिपिक संवर्ग के अधिकारी और कर्मचारी किसी भी विभाग की रीढ़ होते हैं। अभिलेखीकरण और कार्यालयीय कार्यों में उनकी भूमिका सबसे अहम होती है। यह बात रिटायर्ड जिला विकास अधिकारी डॉ. दयाराम विश्वकर्मा ने कही। वह जिला ग्राम्य विकास संस्थान परमानन्दपुर में आयोजित प्रशिक्षण सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित ग्राम विकास विभाग के लिपिक संवर्ग का यह तीन दिवसीय जनपद स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम था। प्रशिक्षण का उद्देश्य कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाना और प्रशासनिक प्रक्रिया को मजबूत बनाना रहा। कार्यक्रम में जनपद वाराणसी के विभिन्न विभागों से 26 नामित प्रतिभागियों ने भाग लिया।

डॉ. दयाराम विश्वकर्मा ने कहा कि लिपिक संवर्ग के पटल पर सबसे अधिक और आवश्यक दस्तावेजी कार्य होता है। इसलिए नियमों की सही जानकारी अत्यंत जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली-1999 की जानकारी दी। इसके साथ ही प्रारंभिक और औपचारिक जांच की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। जांच आख्या तैयार करने की विधि पर भी प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण सत्र में वित्तीय विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षक निसार अहमद ने आयकर की गणना की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने भविष्य निर्वाह निधि, जीपीएफ और ईपीएफ से जुड़े नियमों की जानकारी दी। इससे कर्मचारियों को वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर जिला प्रशिक्षण अधिकारी विमल कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा और ईमानदारी से काम करना चाहिए। उन्होंने तनाव मुक्त रहकर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच से कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इसमें अधिष्ठान संबंधी नियम, पत्राचार की प्रक्रिया और कार्यालय आदेश शामिल रहे। पत्रावलियों के रखरखाव की विधि भी समझाई गई। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षुओं को मानव संपदा पोर्टल और जेम पोर्टल के उपयोग के बारे में भी बताया गया। सामग्री क्रय से संबंधित नियमों पर चर्चा हुई। ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई। व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ और अनुभवी प्रशिक्षकों की उपस्थिति रही। इनमें ज्येष्ठ अनुदेशक संजय कुमार, सुरेश तिवारी और रिटायर्ड सीडीओ हीरालाल शामिल रहे। साथ ही शिवप्रकाश, प्रेमप्रकाश कुलश्रेष्ठ, ज्योति सिंह, डॉ. गीता यादव और अन्य अधिकारियों ने भी प्रशिक्षण को सफल बनाया।