भाग्य कर्म का परिणाम है, यह न तो स्थिर है और न ही अनियंत्रित
अध्यात्म दर्शन मानव जीवन को अर्थ, उद्देश्य और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में ले जाने वाला मार्ग है। यह दर्शन कहता है, जिसने कर्म किया, उसने सबकुछ प्राप्त किया, और जो भाग्य के सहारे बैठा रहा, उसने स्वयं पर नियंत्रण करने का अधिकार औरों को दे दिया। यह कथन कर्म, आत्म-नियंत्रण और जीवन की गतिशीलता का … Read more