रायपुर, 31 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक बचत की दिशा में एक और बड़ा निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन की प्रत्याभूति (गारंटी) पर लिए गए ऋणों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया गया। इस निर्णय के तहत राज्य सरकार ने 55.69 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए ऋणों की पूरी राशि वापस करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
सरकारी जानकारी के अनुसार ये ऋण पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए थे, जिनमें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम और दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम शामिल हैं। इन निगमों से लिए गए ऋणों पर राज्य शासन को वर्तमान में हर वर्ष लगभग 2.40 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान करना पड़ रहा था।
मंत्रिपरिषद के इस निर्णय के बाद ऋण की पूर्ण अदायगी होने पर ब्याज के रूप में होने वाला यह वार्षिक खर्च पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इससे राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 2.40 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल तत्काल वित्तीय राहत देगा, बल्कि भविष्य में होने वाले अनावश्यक व्यय को भी रोकेगा।
इसके साथ ही ऋण की पूरी राशि लौटाए जाने और संबंधित राष्ट्रीय निगमों से एनओसी (अदेय प्रमाण पत्र) प्राप्त होने के बाद राज्य शासन द्वारा दी गई 229.91 करोड़ रुपये की लंबित गारंटी देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। इससे राज्य सरकार की वित्तीय जिम्मेदारियों में उल्लेखनीय कमी आएगी और बजट प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह फैसला राज्य के वित्तीय ढांचे को मजबूत बनाने की रणनीति का हिस्सा है। सरकार की प्राथमिकता है कि अनावश्यक ब्याज भार को कम कर विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिक संसाधन लगाए जाएं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के निर्णयों से राज्य की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होती है और दीर्घकाल में आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।













