Highlights
- पिछड़ा वर्ग आयोग ने की समीक्षा
- पंचायतों में ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति तथा प्रतिनिधित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर हुई विस्तृत चर्चा
- जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उनके विचार, अनुभव एवं सुझाव लिखित रूप में किए गए संकलित
प्रतापगढ़, 4 नवम्बर 2026। प्रतापगढ़ में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया एक कदम आगे बढ़ गयी है। पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रुप देने 3 नवंबर को पिछड़ा वर्ग आयोग ने समीक्षा की।
विकास भवन सभागार में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग के सदस्य बृजेश कुमार (सेवानिवृत्त डीजे), संतोष कुमार विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त एडीजे), डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया (सेवानिवृत्त आईएएस) एवं एसपी सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस) मौजूद रहे।
बैठक में जनपद की पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में भागीदारी, वर्तमान प्रतिनिधित्व तथा आरक्षण व्यवस्था से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने कहा कि ओबीसी वर्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों, संबंधित अभिलेखों तथा जमीनी स्तर पर प्राप्त अनुभवों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 18 मई 2026 को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। आयोग द्वारा जनपदों में समीक्षा कर ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति तथा स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व से संबंधित तथ्य एवं आंकड़े संकलित किए जा रहे हैं। संकलित डाटा एवं निष्कर्ष राज्य सरकार को प्रेषित किए जाएंगे।
बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी एवं अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत ने जनपद में ओबीसी वर्ग के वर्तमान प्रतिनिधित्व, उपलब्ध अभिलेखों तथा संबंधित तथ्यों के बारे में आयोग को जानकारी दी। आगामी पंचायत चुनावों के दृष्टिगत आरक्षण व्यवस्था, निर्धारित आरक्षण प्रतिशत तथा नियमानुसार आरक्षण लागू किए जाने से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
आयोग के सदस्यों ने जनपद के विभिन्न जिला पंचायत सदस्यों, ब्लॉक प्रमुखों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं ग्राम प्रधानों से संवाद स्थापित कर उनके विचार, अनुभव एवं सुझाव प्राप्त किए। जनप्रतिनिधियों ने पंचायतों में ओबीसी वर्ग की भागीदारी, प्रतिनिधित्व तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न विषय आयोग के समक्ष रखे।
जनप्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी को प्रश्नोत्तरी के माध्यम से लिखित रूप में भी संकलित किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनुभवजन्य साक्ष्य एवं जनप्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी ओबीसी वर्ग की वास्तविक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण आधार बनेगी।
आयोग के अध्यक्ष ने मुख्य विकास अधिकारी से कहा कि पंचायत निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने के तत्काल बाद प्रत्याशियों की कार्यशाला आयोजित कराई जाए। कार्यशाला में प्रत्याशियों की समस्याओं एवं सुझावों को सुना जाए और नियमानुसार उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
ओबीसी आयोग के सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, जनता का नेतृत्व करें तथा अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। आयोग ने कहा कि पंचायतों में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से जुड़े विषयों के समुचित आकलन के लिए उपलब्ध अभिलेखों, आंकड़ों, स्थानीय परिस्थितियों और जमीनी अनुभवों का व्यवस्थित संकलन आवश्यक है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राममोहन मीना, जिला पंचायत राज अधिकारी श्रीकान्त दर्वे, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत नरेन्द्र पाल सिंह सहित जनपद के विभिन्न जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, वार्ड सदस्य एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

