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भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना : पीएम मोदी

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, बीते वर्षों में हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना है। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता। इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।

कई बार संसाधनों की कमी के कारण देश रुकता नहीं है लेकिन रुकने का कारण सोच की सीमाएं होती हैं। जब सोच बंध जाती है, सीमाओं में सड़ने लग जाती है तब हम अपने सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं। 

देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है और हमारी गलत सोच के कारण है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे, हमने समुद्री तट पर, 99% हमारा समुद्री तट का पूरा हिस्सा ऐसी सोच के कारण ‘नो-गो एरिया’ घोषित कर रखा है। 

हमने ही समुद्र के अंदर जाकर अन्वेषण न करने का निर्णय कर लिया था। ये सोच का दायरा था। हमने फैसला किया कि ये नहीं चल सकता। हमने उस 99 प्रतिशत क्षेत्र को ‘गो-अहेड एरिया’ के रूप में खुला कर दिया है। हम समुद्र के भीतर भी नए-नए भंडार खोजने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

देश आजाद होने के बाद विश्व में सेमीकंडक्टर की चर्चा हो चुकी थी। हमारे यहां भी बातें होती थी लेकिन सेमीकंडक्टर का कोई बड़ा प्लान हम आगे नहीं बढ़ा पाए…आज की डिजिटल दुनिया और तकनीक में हम चिप का महत्व समझते हैं। कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान होगा, हर किसी में चिप अनिवार्य है। इसके बिना दुनिया थम जाए ऐसी स्थिति पैदा होती है। इसलिए भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में अपना सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया है। 3 प्लांट शुरू हो गए हैं। आने वाले 7-8 साल में और प्लांट शुरू होने वाले हैं।

एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर हमें वैकल्पिक स्रोतों की ओर भी पूरी शक्ति लगाना बहुत जरूरी है। और इसलिए ऊर्जा का सही इस्तेमाल बढ़ाते हुए भारत इसी दिशा में आज तेजी से काम कर रहा है। 2014 से पहले मतलब आज से 12 साल पहले, हमारे देश में केवल 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी। 12 साल में इन 70 शहरों को हमने 700 शहरों तक पहुंचा दिया है। ये होती है रफ्तार। 2014 के पहले मुश्किल से 20-22 लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचती थी। आज 1.75 करोड़ घरों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम होता है।