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80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने किया ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान

नई दिल्ली, 15 अगस्त2026 । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश के सामने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान करता हूं। आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ उस ‘सप्त धारा’ के सामर्थ्य से, उसकी शक्ति से हम देश को नई ऊंचाई और गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाले सामर्थ्य देंगे। इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य का भी भरपूर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा, उनकी शक्ति जोड़ी जाएगी। आने वाले दिनों में जब मैं सप्त धारा की बात करता हूं तो उसकी पहली शक्ति है मैन्यूफैक्चरिंग पावर… इस सप्त धारा की दूसरी शक्ति है, कृषि और खाद्य उत्पादन… मेरी सप्त धारा की तीसरी शक्ति है, प्रौद्योगिकी और नवाचार… सप्त धारा की चौथी शक्ति है गति शक्ति… हमारी पांचवी सप्त धारा की शक्ति रक्षा बल है… हमारी सप्त धारा की छठी शक्ति है, ग्रीन इकॉनमी और ब्लू इकॉनमी… हमारी सप्त धारा की सांतवीं धारा है और दुनिया के लिए इसका अपना भी महत्व है जो है, भारत की ‘सॉफ्ट पावर’।

कुछ चीजें मैंने बताई है लेकिन मैं इससे भी आगे सोचता हूं। मैं जरा देश को झकझोरना चाहता हूं, मैं देश की शक्ति को भी झकझोरना चाहता हूं। देश यानी केवल सरकार नहीं होती है, देश का मतलब हर नागरिक जुड़ता है। क्या हम सोच नहीं सकते कि  फॉर्च्यून 500 की चर्चा तो हम बहुत सुनते हैं, आने वाले 1 दशक में इन फॉर्च्यून 500 में 50 कंपनियां भारत की क्यों न हों, ये लक्ष्य हमारा क्यों न होना चाहिए। 

भारत का भी एक बैंक टॉप 5 बैंकों में भी होना चाहिए। समय की मांग है कि दुनिया की 5 बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की भी 1-2 फार्मा कंपनियों का नाम गूंजना चाहिए। क्या समय की मांग नहीं है कि ग्लोबल लीडरशिप अब हमारे हाथ में होनी चाहिए? सामर्थ्य है, हमारा लंबा इतिहास भी है, भाषाओं पर हमारा प्रभुत्व है, हमें विश्व में पहुंचना चाहिए। हमारे ऐसे ब्रांड हों, जिससे दुनिया आकर्षित होती है। हमारे ब्रांड हमारी पहचान हो और विश्व के लिए एक डेस्टिनेशन बन जाए, हमें इसके लिए काम करना होगा। मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूं, मैं स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं को कहना चाहता हूं, भारत सरकार का भी ये दायित्व है कि हमें अपने सुधारों की गति बढ़ानी होगी। हम बीते हुए काल के नीति नियमों पर नहीं चल सकते हमें आने वाले काल के अनुसार नीति नियमों को गढ़ना होगा।