नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। लाल किले पर आयोजित समारोह के दौरान पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाया गया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ ही 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के गनर्स ने 21 तोपों की सलामी दी। स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल करने वाली इस सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत के पास थी और गन पोजीशन ऑफिसर नायब सूबेदार (गनरी में असिस्टेंट इंस्ट्रक्टर) अनुतोष सरकार रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, “आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सभी के लिए आज एक ऐतिहासिक पल भी है। आजादी के बाद 15 अगस्त, लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है। आज जब हम देश के लोग वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो इससे बड़ा उत्तम अवसर क्या हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, तब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है, जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है। अब छोटे सपनों से चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं… हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए।
जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाईयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है। हमारे संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए क्योंकि जब सपने ऊंचे होते हैं, संकल्प ऊंचे होते हैं तो हमारे सामर्थ्य की ऊंचाई भी बढ़ती है, हमारे प्रयासों की ऊंचाई भी बढ़ती है और तब जाकर हम सपनों को साकार कर सकते हैं।
आज भारत ने भी एक बहुत बड़ा सपना देखा है, दृढ़ संकल्प के साथ देखा है। नई ऊंचाइयों को छूने के लिए देखा है। वो सपना है जब आजादी के 100 साल होंगे, 2047 में हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे।
140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है तो ये दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है। दुनिया हमारी ओर देखने का नजरिया बदलने को मजबूर हो जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, देश आजाद हुआ, बहुत सारे सपने लेकर आजाद हुआ लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए, रफ्तार नहीं पकड़ पाए, होती है-चलती है, हो जाएगा-देखा जाएगा, इसी में खोए रहे।
2014 तक आते-आते तो पूरे विश्व ने हमें ‘फ्रेजाइल फाइव’ में डंप कर दिया था। ऐसे समय में पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी है। तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं। देश-राज्यों का संकल्प है कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प को, सामर्थ्य को रोक पाना नामुमकिन है।
पिछले 12 वर्षों में डिफेंस प्रोडक्शन करीब 4 गुना बढ़ा, खादी एवं ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब 5 गुना हुआ, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब 7 गुना बढ़ा, आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना बढ़ा, मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा, इतना ही नहीं आधुनिक युग को लेकर भी डिजिटल और इनोवेशन की दुनिया में भी हमने अपना परचम लहराया।
इंटरनेट यूजर्स, इंटरनेट कंज्यूमर्स करीब-करीब 4 गुना बढ़े करीब-करीब 50 गुना बढ़े, पेटेंट ग्रांट होने की संख्या 4 गुना बढ़ी, डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े, सामान्य मानवी की सुविधा की ओर भी हमने उतनी ही गंभीरता से काम किया।
हर साल औसतन 15 गुना ज्यादा तेजी से हमने नल से जल कनेक्शन दिए, हर साल औसतन 6 गुनी ज्यादा रफ्तार से लोगों को गैस कनेक्शन दिए, हर साल 4 गुनी रफ्तार से गरीबों के लिए शौचाल्य बनाने का काम किया, हर साल 3 गुना ज्यादा तेजी से गरीबों को घर देने का काम किया, देश ने गवर्नेंस में भी बहुत बदलाव लाया… सैकड़ों की तादाद में कानूनों को खत्म किया।
पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं शताब्दी की मार्च नहीं हो सकती। हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेट्रो का विस्तार किया… ये सब, ये रफ्तार, ये विस्तार, ये उपलब्धी आजादी के बाद पहली बार पिछले एक दशक में देखी है।
जब इतनी सारी सिद्धियां हमारे सामने है, इतनी तेज गति दिखाई देती हो, देशवासियों का सामर्थ्य पल-पल प्रकट होता है तब तो2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प कभी भी अधूरा नहीं रह सकता है। ये सारे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं।
