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प्रकृति और गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा: गायत्री नंदन

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On मई 15, 2026
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प्रकृति और गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा: गायत्री नंदन

गौरा (प्रतापगढ़), 15 मई 2026। विकासखंड गौरा के बोर्रा गांव में ओम प्रकाश पांडेय के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें और छठे दिवस कथा व्यास गायत्री नंदन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पूजा तथा रुक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्तिरस में डूब गए और पूरा पंडाल राधे-राधे तथा जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।

कथा व्यास ने गोवर्धन पूजा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया था। उन्होंने बताया कि प्रकृति और गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से हर संकट दूर किया जा सकता है। महाराज ने कहा कि मनुष्य को अभिमान से दूर रहकर सदैव ईश्वर एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।

रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। उन्होंने भगवान को संदेश भेजकर स्वयं को शिशुपाल से बचाने की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया। इस प्रसंग को सुनाते हुए महाराज ने कहा कि सच्चा प्रेम और अटूट विश्वास अंततः विजय दिलाता है। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं और उन्हें हर संकट से उबारते हैं।

कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों और भजनों पर झूमते नजर आए। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

आयोजक ओम प्रकाश पांडेय एवं परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।