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पूर्वांचल में शिक्षा की क्रांति के नायक प्रो. बजरंग त्रिपाठी का निधन

पूर्वांचल में शिक्षा की क्रांति के नायक प्रो. बजरंग त्रिपाठी का निधन

आजमगढ़, 17 जुलाई 2025। प्रो. बजरंग त्रिपाठी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में दो दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर शिक्षा की ज्योति जलाई, उनका गुरुवार, 17 जुलाई 2025 को प्रात:काल निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

वे आल इंडिया चिल्ड्रन केयर एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के संस्थापक रहे। उन्हें पूर्वांचल का मदन मोहन मालवीय कहा जाता है। उनके निधन की खबर से आजमगढ़ ही नहीं, पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रो. त्रिपाठी की स्मृति में उनकी संस्था द्वारा संचालित सभी शिक्षण संस्थाएं तीन दिनों तक बंद रहेंगी। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार, 18 जुलाई 2025 को अंबेडकरनगर जनपद के रामबाग घाट पर किया जाएगा। इस अवसर पर उनके अनुयायी, छात्र, और स्थानीय लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए एकत्रित होंगे।

प्रो. बजरंग त्रिपाठी के संघर्ष और समर्पण की कहानी

प्रो. बजरंग त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के जहांगीरगंज कस्बे में एक साधारण परिवार में हुआ था। साधारण संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं। 1963 में आजमगढ़ के शिब्ली नेशनल कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने 1966 में एनसीसी में सेवा शुरू की।

इसके बाद गृह मंत्रालय में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन शिक्षा के प्रति उनका प्रेम और जुनून कभी कम नहीं हुआ। 1970 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. पूरा किया और फिर साकेत कॉलेज, फैजाबाद में डिफेंस स्टडीज के लेक्चरर के रूप में कार्य शुरू किया। 1972 में वह शिब्ली नेशनल कॉलेज में लेक्चरर नियुक्त हुए, जहां उन्होंने 28 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया और हजारों छात्रों को प्रेरित किया।

शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति

उनका योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने शिक्षा को एक मिशन के रूप में अपनाया और समाज में बदलाव लाने का संकल्प लिया। 7 जुलाई 1977 को उन्होंने आजमगढ़ के हरबंशपुर में किराए की इमारत में चिल्ड्रन स्कूल की स्थापना की, जो यूकेजी से कक्षा 8 तक की पढ़ाई के लिए था। यह स्कूल उनके सपनों का पहला कदम था। इसके बाद, उन्होंने सर्फुद्दीनपुर में एक विशाल परिसर में चिल्ड्रन कॉलेज की नींव रखी। 1986 में इस कॉलेज को आईसीएससी बोर्ड और 1992 में सीबीएसई बोर्ड की मान्यता मिली, जिसने इसे पूर्वांचल के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में स्थापित किया।

उनका दृष्टिकोण केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने व्यावसायिक और चिकित्सा शिक्षा को भी बढ़ावा दिया। 1999 में 300 बेड वाला फार्मेसी कॉलेज, 2005 में डेंटल कॉलेज, और 2006 में नर्सिंग डिग्री कॉलेज की स्थापना ने उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को और मजबूत किया। अंबेडकरनगर में संत कमला पब्लिक स्कूल सहित उनके द्वारा स्थापित दो दर्जन से अधिक संस्थान आज भी हजारों छात्रों के भविष्य को आकार दे रहे हैं। उनकी संस्था, आॅल इंडिया चिल्ड्रन केयर एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बन चुकी है।

वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, प्रो. बजरंग त्रिपाठी एक शिक्षक से कहीं अधिक थे। वह एक विचार, एक आंदोलन और शिक्षा में समर्पण की मिसाल थे। उन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर अपनी मेहनत, दूरदर्शिता, और संगठनात्मक क्षमता से तय किया।