धर्म

आत्म-साक्षात्कार और संतापों से मुक्ति का मार्ग है श्रीमद्भागवत कथा: गायत्री नंदन

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On मई 12, 2026
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श्रीमद्भागवत कथा

गौरा (प्रतापगढ़), 12 मई 2026। विकासखंड गौरा के बोर्रा गांव में भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। ओम प्रकाश पांडेय के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रीधाम अयोध्या से पधारे कथा व्यास गायत्री नंदन जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से कथा का रसपान कराया। उन्होंने बताया कि भागवत कथा जीवन जीने की कला और मोक्ष का द्वार है।

महाराज जी ने कथा के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए मानसिक शांति खो चुका है। ऐसे में श्रीमद्भागवत वह अमृत है, जो अशांत मन को स्थिरता प्रदान करता है।

शास्त्रों के अनुसार, कलियुग में नाम संकीर्तन और भागवत श्रवण ही सबसे सुलभ साधन है जो मनुष्य के पापों का शमन करता है। यह कथा हमें सिखाती है कि संसार में सब कुछ नश्वर है। भगवान श्री कृष्ण के जीवन चरित्र से हमें विनम्रता और शरणागति का भाव सीखने को मिलता है। श्रीमद्भागवत के महात्म्य में वर्णित है कि जो व्यक्ति भक्तिभाव से इसे सुनता है, उसकी सात पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है।

भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मिलन

तीसरे दिन की कथा में महाराज जी ने समझाया कि जब तक मनुष्य के भीतर वैराग्य उत्पन्न नहीं होता, तब तक ज्ञान का प्रकाश नहीं फैलता। उन्होंने कहा, भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। जो इसे सुनता है, वह प्रभु के हृदय में स्थान पाता है।

कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भागवत श्रवण का फल तभी प्राप्त होता है जब उसे केवल कान से नहीं, बल्कि हृदय से सुना जाए। श्रवण के बाद मनन और फिर उसे आचरण में उतारना ही वास्तविक आध्यात्मिकता है।

जीवन का वास्तविक लक्ष्य

गायत्री नंदन जी ने कहा कि मनुष्य जन्म दुर्लभ है। हम 84 लाख योनियों के बाद इस शरीर को प्राप्त करते हैं, लेकिन इसे केवल वासना और संचय में गंवा देते हैं। श्रीमद्भागवत हमें ‘स्व’ की पहचान कराती है। यह हमें बताती है कि हम शरीर नहीं, बल्कि उस परमात्मा के अंश हैं। जिस प्रकार जल के बिना मछली जीवित नहीं रह सकती, उसी प्रकार ईश्वर की भक्ति के बिना आत्मा कभी तृप्त नहीं हो सकती।

भक्तिमय हुआ वातावरण

कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। ‘राधे-राधे’ के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। यजमान ओम प्रकाश पांडेय और उनके परिवार ने विधि-विधान से पूजन किया और आरती उतारी। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे।

Ramesh Pandey

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।