संवेनशीलता की क्लास में गोंड़वी की कविता का दृश्यपाठ देख भावुक हुए प्रशिक्षु पुलिस अधिकारी

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रायपुर। अदम गोंड़वीं जब अपने बगावती तेवर में अपने शेर पढ़ते थे तो लगता था कि एक पल में ही वे सारी व्यवस्था को बदल देना चाहते हैं। उनकी कविताएं ग़रीब और दबे-कुचले और अंतिम पंक्ति में सबसे पीछे खड़े आदमी का हथियार होती हैं। उनकी एक रचना एक दलित लड़की से रेप और अन्याय की सच्ची घटना पर आधारित है। इस कविता में अदम गोंड़वी ने रेप पीड़िता की खूबसूरती बयान करने के लिए उसे ‘सरयु पार की मोनालीसा’ कहा है। पुलिस के प्रशिक्षु अधिकारियो को संवेदनशीलता का मर्म समझाने के लिए इस कविता का दृश्यपाठ अकादमी के पुलिस अधिक्षक शशिमोहन सिंह ने आयोजित किया था। अभिनट रायपुर, द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस अकादमी चंदखुरी रायपुर में पुलिस अधिक्षक शशिमोहन सिंह के सहयोग से इस बहुचर्चित कविता का दृश्यपाठ 9 फरवरी को पुलिस अकादमी के प्राशासनिक भवन के सभागार में योग मिश्र के निर्देशन में किया गया था। इस एकल दृश्यपाठ में संजीव मुखर्जी ने अपने सशक्त अभिनय से प्रशिक्षु अधिकारियों को द्रवित कर दिया। प्रदर्शन के बाद प्रशिक्षु अधिकारियों से निर्देशक और कलाकार रूबरू हुए और उनकी जिज्ञासाओं पर विस्तार से बातचीत हुई। कार्यक्रम के आरम्भ में पुलिस अधिक्षक शशिमोहन सिंह ने पुलिस की संवेदनशीलता और कम्युनिकेशन के संबंध में जानकारी देते हुए कविता के दृश्यपाठ का महत्व प्रशिक्षु अधिकारियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे एक पुलिस मेन को अपने जीवन में दया, करूणा, प्रेम, आनंद के भाव से अपनी सख्त डिवटी के दौरान व्यवहार करना चाहिए। कैसे उत्तेजना रहित होकर अपनी संवेदनशीलता सदैव बनाये रखना चाहिए।

योग मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा- “संवेदना हृदय में न होती तो हृदय पाषाण हो गया होता। मधुरिमा कंठा में न होती तो शब्द विष बाण हो गया होता। फिर उन्होंने गुरूनानक देव की एक कहानी के माध्यम से संवेदनशीलता का महत्व प्रशिक्षु अधिकारियों को समझाया। इसके बाद छत्तीसगढ़ी सिनेमा माटी के लाल के कुछ अंश दिखाया गया जिसमें पुलिस की संवेदनशील भावना कैसी होनी चाहिए बताया गया था।
अंत में अदम गोंडवी की कविता ‘सरयुपार की मोनालिसा’ के मार्मिक दृश्यपाठ ने प्रशिक्षु अधिकारियों को भावुक कर दिया। सरयुपार की मोनोलिसा एक स्त्री के बलात्कार के बाद न्याय नहीं मिलने की सत्य घटना से उपजी कविता है। वैसे भी कविता मनोरंजन के लिए नहीं विचार के लिए होती है। यह कविता प्रशिक्षु अधिकारियों को अपनी कर्मभूमि में विचार करने जरूर मजबूर करती रहेगी।

यह सरयुपार की मोनालिसा की व्यथा देखकर अपने विचार प्रकट करते हुए प्रशिक्षु अधिकारियों ने कहा कि हमें यह कविता अंदर तक झकझोर गई। जमाना बदल सकता है यदि थोड़ा-थोड़ा हम बदल सकें। हम थोड़ा संवेदनशील हो सकें। यही पुलिस ट्रेनिंग अकादमी के इस सत्र के आयोजन का उद्देशय भी था। इस दौरान एडिश्नल एसपी संगीता पीटर, डीएसपी आरएस द्विवेदी, एसआई ममता अली, एसआई, हरीश तिवारी सहित अकादमी के समस्त अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।