छत्तीसगढ़ में बहुरेंगे नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के ‘दिन’

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रायपुर। मिशन 2018 की शुरुआत करने से पहले कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में नारा दिया था कि ‘नरवा, गरवा, घुरवा अऊ बाड़ी, कांग्रेस बचाही एला संगवारी’। इस नारे के साथ कांग्रेस के चुनावी समर में उतरने का ऐलान खुद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने किया था। 16 जुलाई 2018 को भूपेश बघेल ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर आयोजित पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में इस बात की घोषणा की थी। उन्होंने खुद पार्टी नेताओं की बैठक में कहा था कि इस बार कांग्रेस ‘नरवा (नाला), गरवा (गाय), घुरवा (जैविक खाद) और बाड़ी (खेत), कांग्रेस बचाई ऐला संगवारी’ नारे के साथ चुनाव में उतरेगी। यदि सरकार बनी, तो इसी मॉडल के आधार पर गांवों में रोजगार पैदाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम करेंगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बघेल ने कहा था कि 15 साल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सिंचित रकबा नहीं बढ़ा पाई है। हम नरवा को बचाने के लिए काम करेंगे। नरवा का पानी रोकेंगे और खेत की तरफ ले जाएंगे। उन्होंने कहा था कि छत्तीसगढ़ में खुले में मवेशी चराने की परंपरा है। हम जिन गायों की पूजा करते हैं, उन्हें अब फसल बचाने के लिए दूसरे गांव में खदेड़ने के लिए किसान बाध्य हो रहे हैं। दूसरी तरफ हार्वेस्टर के जरिए चारा को अलग करने के बाद उसे खेतों में ही जला दिया जाता है। हम इस चारे को एकत्र कर गोठान (जहां चारा रखा जाता है) तक ले जाएंगे। इसके लिए गो-पालकों को मनरेगा के तहत जोड़कर चारा एकत्र करवाया जाएगा। जो मवेशी खुले में चरते हैं, उन्हें 12 माह चारा देंगे और गायों का गोबर और गो-मूत्र एकत्र करेंगे। इसे ईंधन और खाद बनाकर उसे सस्ते दर में उपलब्ध कराएंगे, इससे खेती सुधरेगी और गांव में सस्ता ईंधन मिलेगा। इसी मॉडल के जरिए हम गांव में रोजगार पैदा करेंगे और इससे अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी। इस बैठक में भूपेश बघेल ने यह भी निर्णय लिया था कि स्व. खूपचंद बघेल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के जन्म स्थल ग्राम पथरी से दिनांक 19 जुलाई 2018 खूपचंद बघेल जी के जन्मदिन से पूरे प्रदेश में शुरू होकर ‘नरवा, गरवा, घुरवा अऊ बाड़ी, कांग्रेस बचाही एला संगवारी’अभियान का ग्राम अगम धाम खड़वा सिमगा में मिनी माता की पुण्यतिथि पर समापन होगा। गांधी जी के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को साकार करने के लिये एवं मजबूत बनाने के लिए यह योजना भूपेश बघेल द्वारा लाई गई थी जिससें ग्रामों में आर्थिक क्रांति एवं समृद्धि आयेगी तथा ग्रामों का शिक्षा स्वास्थ्य सहित सर्वांगीण विकास होगा, ऐसा सपना देखा गया था। मुख्यमंत्री के पद पर भूपेश बघेल की ताजपोशी से उम्मीद बढ़ गयी है कि अब छत्तीसगढ़ में नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के ‘दिन’ बहुरने वाले हैं।