पर्यावरण संकट विकराल, हानिकारक वस्तुओं के उपयोग से बचें : साध्वी कृष्णा

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रायपुर। संत आशारामजी बापू आश्रम के तत्वाधान में भाठागांव स्थित गिरिजा वाटिका में मंगलवार को बापूजी की शिष्या साध्वी कृष्णा देवी का गीता भागवत सत्संग आयोजित किया गया। प्रारंभ में साध्वी ने सबको कुछ देर तक ध्यान कराया उसके बाद देव-मानव हास्य प्रयोग का अभ्यास कराके सत्संग प्रारंभ किया। साध्वी ने बताया कि हर जीव की मांग का नाम है सत्संग। जो सत्संग नही करता वह कुसंग जरुर करता है। सत्संग में वह ताकत होती है कि किसी न किसी तरह से मनुष्य को सत स्वरुप परमात्मा की ओर आगे बढाता है। रोज आधे घंटे का तो ध्यान करना ही चाहिए।साध्वी ने बताया कि गौ, गीता, गंगा, गायत्री के साथ तुलसी माता भी हमारी संस्कृति की आधार स्तम्भ है। तुलसी का धार्मिक, आयुर्वेदिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। सभी प्रकार के पत्तों और पुष्पों की अपेक्षा तुलसी ही श्रेष्ठ मानी गयी है। कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान, रोपण और धारण करने से वह पाप को जलाती और स्वर्ग तथा मोक्ष प्रदान करती है। जो तुलसी के पूजन आदि का दूसरों को उपदेश देता और स्वयं भी आचरण करता है, वह भगवान के परम धाम को प्राप्त होता है। ऐसा पद्म पुराण के सृष्टि खंड में आया है। साध्वी ने यह भी बताया कि बापू ने वर्ष 2014 से 25-दिसम्बर तुलसी पूजन दिवस की शुरूआत की है जो समय के साथ भारतीय संस्कृति के महत्व को समझने वाली बुद्धियो द्वारा बड़े स्तर पर स्वीकार्य होता जा रहा है। इससे पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी और नयी पीढ़ी में अच्छे संस्कार भी जगेंगे। आज पर्यावरण का संकट इतना विकराल है तो फटाके, प्लास्टिक के पेड़, आदि हानिकारक वस्तुओं के उपयोग से बचने का प्रयास हमे करना चाहिए।