माटी में समा गया ‘माटी’ का लाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के एक विलक्षण और चमकदार सितारे को रविवार को राजधानी रायपुर में नम आँखों से श्रद्धांजलि सहित अंतिम विदाई दी गयी। जीवन भर माटी-महतारी की महिमा का बखान करने वाला माटी का लाल यह प्रतिभावान कवि छत्तीसगढ़ की माटी में समा गया। लोक गायक और गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया का शनिवार को निधन हो गया था। खारुन नदी के किनारे महादेव घाट स्थित कबीरपंथियों के मुक्ति धाम में उनके सामाजिक-धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार रविवार की दोपहर उन्हें समाधि दे दी गई। इस गमगीन माहौल में आम नागरिक, दिवंगत कवि के परिजन, कबीर पंथ के अनुयायी और साहित्यिक-सांस्कृतिक बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे। समाधि स्थल के पास कबीर भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भिलाई नगर से आए साहित्यकार रवि श्रीवास्तव ने लक्ष्मण मस्तुरिया के जीवन-संघर्ष के अनेक अनछुए पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मस्तूरी से जांजगीर होते हुए लक्ष्मण के सफर का तीसरा पड़ाव राजिम था, जहाँ सन्त कवि पवन दीवान के आश्रम स्थित संस्कृत विद्यालय में दीवान जी की पहल पर वह अध्यापक बन गए। साथ ही अतिरिक्त आमदनी के लिए राजिम से लगे नवापारा में टेलरिंग का भी काम करते थे। रवि श्रीवास्तव ने लक्ष्मण के बारे में एक नयी बात यह भी बतायी कि वे श्रमिक नेता भी बन गए थे। उन्होंने नवापारा राजिम के समीप पारागांव में बीड़ी कारखाने के श्रमिकों का कुशल नेतृत्व किया था। फिर रायपुर के लाखेनगर के स्कूल में भी अध्यापन किया। कांकेर के जंगल विभाग में भी कुछ समय तक नौकरी की। बाद में वह अध्यापक के रूप में रायपुर के राजकुमार कॉलेज से रिटायर हुए। श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मोर छइहां -भुंइया’ के निर्माता सतीश जैन ने भी अपने संस्मरण सुनाए। राज्य निर्माण के आसपास वर्ष 1999-2000 में बनी इस फिल्म के लोकप्रिय गीत लक्ष्मण मस्तुरिया ने लिखे थे। स्वर्गीय श्री मस्तुरिया को श्रद्धांजलि देने युवा फिल्म अभिनेता पद्मश्री सम्मानित अनुज शर्मा, वरिष्ठ फिल्मकार प्रेम चन्द्राकर, मनोज वर्मा और चन्द्रशेखर चकोर, संगीतकार और सूफी गायक मदन चौहान, लोक गायिका सीमा कौशिक, गायक और संगीतकार राकेश तिवारी, साहित्यिक बिरादरी से रायपुर के चेतन भारती, आशीष सिंह, पंचराम सोनी, सुखदेवराम साहू, स्वराज करुण, सुखनवर हुसैन, मीर अली मीर, डॉ. बालचन्द कछवाहा, दुर्ग के संजीव तिवारी, धमतरी के डुमनलाल धु्रव और रायपुर के पत्रकार समीर दीवान सहित बड़ी संख्या में अन्य कई कवि, लेखक और कलाकार शामिल हुए। दिवंगत आत्मा के सम्मान में दो मिनट का मौन धारण किया गया।

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