आलोक वर्मा सीबीआई के डायरेक्टर पद पर बहाल

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर को बहाल कर दिया है, लेकिन साथ ही कहा है कि वह कोई नीतिगत फैसला तब तक नहीं ले सकेंगे, जब तक कि उनके मामले पर कमिटी फैसला नहीं ले लेती। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर 2018 के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का फैसला किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि आलोक वर्मा कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेंगे और उनके मामले में कमिटी फैसला लेगी। कमिटी नए सिरे से आलोक वर्मा के केस को देखेगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पीएम, चीफ जस्टिस और विरोधी दल के नेता वाली हाई पावर कमिटी आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करेगी। जब तक कमिटी फैसला नहीं लेती तबतक सीबीआई डायरेक्टर कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर मंगलवार को फैसला सुनाया, जिसमें सीबीआई डायरेक्टर ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को मामले की सुनवाई के बाद इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा के अलावा एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से अर्जी दाखिल कर मामले की एसआईटी जांच की मांग की थी। साथ ही सरकार द्वारा छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया था जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीवीसी से जवाब दाखिल करने को कहा था। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लोक सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह सरकार के लिए सबक है। आज आप कुछ लोगों पर दबाव बनाने के लिए इन एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं, कल कोई और करेगा, ऐसे में लोकतंत्र का क्या होगा? सीबीआई विवाद में एनजीओ की तरफ से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने आज सरकार और सीवीसी के आलोक वर्मा को पद से हटाने का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने उनकी शक्तियां छीनने और छुट्टी पर भेजने के फैसले को अवैध ठहराया। भूषण ने बताया कि कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार एक उच्चस्तरीय कमिटी, जिसमें नेता विपक्ष भी हों बनाए और 7 दिनों के अंदर कमिटी इस पर विचार करे। जब तक कमिटी मामला सुलझ नहीं लेती, तब तक वर्मा कोई महत्वपूर्ण फैसले नहीं लेंगे। उनकी अभी सारी शक्तियां फिर से बरकरार नहीं हुई हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले को राफेल मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि आलोक वर्मा राफेल मामले में जांच कर रहे थे, इसलिए उन्हें गैरलोकतांत्रिक और गैर कानूनी ढंग से उनके पद से हटाया गया। आज सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी को दिखा दिया है कि लोकतंत्र चुप नहीं बैठेगा।