घरेलू ई कामर्स कम्पनियों पर ई कामर्स के नियम क्यों नहीं लागू हो

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रायपुर। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र दोषी, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री परमानन्द जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने 1 फ़रवरी से जब से ई कामर्स में एफडीआइ पॉलिसी के नियम लागू हुए हैं तब से देश के ई कामर्स बाज़ार में विभिन्न प्रकार की त्राहि मची हुई है जबकि एमेजान और फ्लिपकार्ट जैसी कम्पनियों को अपने पोर्टल से अनेक प्रकार के सामानों को हटाना पड़ा है जिससे यह साफ़ होता है की पूर्व वर्षों में ये पोर्टल अपने फ़ायदे के लिए जमकर पॉलिसी का उल्लंघन कर रहे थे । क्योंकि ये कम्पनियाँ पॉलिसी का उल्लंघन करने की आदत से मजबूर हैं इस दृष्टि से आशंका व्यक्त की जा रही है की इस पॉलिसी का उल्लंघन करने के लिए भी ये कम्पनियाँ रास्ते तलाश रही हैं । उधर दूसरी तरफ़ मुकेश अम्बानी द्वारा शीघ्र ही ई कामर्स बाज़ार में प्रवेश करने की घोषणा की है और घरेलू ई कामर्स कम्पनियों पर पॉलिसी लागू न होने से वो इस समय फ़ायदे में हैं जिसका सीधा मतलब यह है की जो अस्वस्थ बिज़नेस पद्धति एमेजान और फ्लिपकार्ट अपना रहे थे जिसमें लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, बड़ी मात्रा में डिस्काउंट देना आदि वो काम अब घरेलू कम्पनियाँ करेंगी और पॉलिसी को लागू करने की सरकार की मंशा धरी की धरी रह जाएगी जिसका ख़ामियाज़ा पहले की तरह व्यापारियों को भुगतना पड़ेगा ।
इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) जो पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इस मुद्दे पर एक राष्ट्रीय अभियान चलाए हुए है ने माँग की है की ई कामर्स में लागू एफडीआइ पॉलिसी को घरेलू ई कामर्स कम्पनियों पर तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए जिससे ई कामर्स बाज़ार में एकरूपता बनी रहे और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बने। कैट ने कहा की 1 फ़रवरी से पॉलिसी के लागू होने के बाद से ई कामर्स व्यापार घरेलू कम्पनियों के लिए एक खुला मैदान बन गया है। मुकेश अम्बानी के ई कामर्स सेक्टर में प्रवेश करने की घोषणा से देश के रीटेल बाज़ार में खलबली मची हुई है । यह सर्व विदित है की श्री अम्बानी टेलिकॉम सेक्टर में घुसे और अपने संसाधनों के बल पर टेलिकॉम सेक्टर में उन्होंने लगभग एकाधिकार हासिल कर लिया है । यह सिलसिला ई कामर्स में भी दोहराया जा सकता है । श्री अम्बानी के अलावा अन्य बड़े कॉपोरेट घरानों की आँखें भी ई कामर्स व्यापार पर टिकी हुई हैं और वो भी शीघ्र ई कामर्स व्यापार में आ सकते हैं जबकि इस समय घरेलू कम्पनियों के लिए कोई नियम अथवा पॉलिसी नहीं है । प्रतिवर्ष भारत में रीटेल व्यापार लगभग 42 लाख करोड़ रुपए से अधिक का होता है और हर घरेलू कम्पनी चाहेगी की ई कामर्स के ज़रिए उसकी इस व्यापार में अधिक से अधिक हिस्सेदारी हो।
इस परिपेक्ष्य में कैट ने सरकार से माँग की है कर पॉलिसी की पवित्रता को बरक़रार रखने और उसे पूर्ण रूप एवं एक समान पूरे देश में लागू करने के लिए एफडीआइ पॉलिसी के नियम घरेलू ई कामर्स कम्पनियों पर भी लागू किए जाएँ और न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत की पालना भी हो । अब क्योंकि घरेलू व्यापार पूरे तौर पर वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आ गया है इस नाते से नियम एवं पॉलिसी लागू करने में मंत्रालय को किसी की ओर देखना भी नहीं है । कैट ने कहा की वो इस मुद्दे को पूरी गम्भीरता से सरकार के साथ उठाएँगे और शीघ्र ही कैट का प्रतिनिधिमंडल वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु , वित्त मंत्री पीयूष गोयल एवं नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत सहित अन्य प्रमुख अधिकारियों से मिलेगा और घरेलू कम्पनियों पर पॉलिसी लागू करने की ज़ोरदार माँग करेगा । कैट ने कहा की यदि हमारी बात नहीं मानी गयी तो मजबूर होकर हमें देश भर में इस मुद्दे पर आंदोलन छेड़ना पड़ेगा ।