लड़कियों के लिए मार्शल आर्ट उतना ही जरुरी जितना जीवित रहने ऑक्सीजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की खिलाड़ी पद्मा ब्यौहार का नाम अब लोग जानने लगे हैं। हाल ही में उन्होंने 65 किलोग्राम वर्ग से विशाखापत्तनम में संपन्न इंटरनेशनल ओपन चैंपियनशिप में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीता और चर्चा में आयीं। इसके अलावा पद्मा ने दिल्ली में होने वाले इंडिपेंडेंस कप में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर मेडल प्राप्त किया था, गोवा नेशनल चैंपियंस चैंपियनशिप में गोल्ड लाकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया था। कराते में ब्लैक बेल्ट डेन हो चुकी पद्मा का जन्म 11 फरवरी 2002 को रायपुर में हुआ था और क्लास तीसरी से कराते सीखना शुरू किया। वो मानती हैं कि लड़कियों के लिए मार्शल आर्ट सीखना उतना ही जरुरी है जितना जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन। उनके रायपुर लौटने के बाद हमने उनसे बात की-

प्रश्न – अपनी तरुण अवस्था में इस उपलब्धि पर कैसा महसूस करती हैं?
पद्मा – बहुत अच्छा महसूस होता है। अंदर से सकारात्मकता बढ़ती है जब आप अपने राज्य और देश के लिए खेलते हैं। मेरे लिए हार या जीत उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना मन लगाकर सीखना और खेलना है। फिर भी जीत तो जीत होती है इससे राज्य और देश का नाम होता है।

प्रश्न – आपने कराते सीखना कब और कैसे शुरू किया?
पद्मा – जब मैं क्लास थर्ड में थी तब एक समर कैंप भेजी गयी थी, जहाँ कराते से मेरा पहला परिचय हुआ। तब से सीखने की जिद करने लगी थी। जब क्लास छटवी में पहुँची तब मेरे माता पिता ने मुझे कराते क्लास ज्वाइन करवा दिया। मेरे पेरेंट्स शायद इसलिए तैयार हुवे क्योकि मैं उनकी इकलौती संतान थी, ताकि आत्मरक्षा कर सकूँ। लेकिन मेरा मन इसमें रमने लगा और हाई स्कूल पहुँचते तक मैंने इस खेल को ही अपना कॅरियर चुनने की मानसिकता बना चुकी थी। अब कराते के साथ पढ़ाई भी कर रही।

प्रश्न – लड़कियों के लिए कराते को कितना महत्वपूर्ण समझती हैं?
पद्मा- लड़कियों के लिए तो कराते सीखना बहुत ज्यादा जरुरी है। उतना ही जितना जीने के लिए ऑक्सीजन जरुरी होता है। जब कोई लड़की स्वयं की सुरक्षा कर सकती है तो कोई भी उसका आत्मविश्वास डिगा नहीं सकता। वह अपने जीवन में कुछ भी बिना डरे कर सकती है। आज के समय में तो यह और भी जरुरी हो गया है। आज लड़कियां सेना और पुलिस में सेवा दे रही हैं। सभी फील्ड में लड़कियों को आत्मरक्षा करना आना ही चाहिए।

प्रश्न – सफलताओं के लिए किनको श्रेय देना चाहेंगी?
पद्मा – अभी तो यात्रा की शुरुवात ही है। अभी तक मुझे जिनका जिनका सहयोग मिला उन सबकी शुक्रगुजार हूं, विशेषकर जिनसे सीख रही हूँ मेरे कोच रमेश प्रधान सर के लिए। उन्होंने मेरी इस स्किल को अपनी मेहनत से उभार दिया, जो वो उन सभी बच्चों के लिए प्रयासरत रहते हैं जिनको वे सिखाते हैं। मेरे सहयोगी खिलाड़ी जो मेरा उत्साह बढ़ाते हैं। मेरे स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षक और मेरे माता-पिता सभी को इसका श्रेय जाता है।

प्रश्न – अब तक कितने नेशनल और इंटरनेशनल खेलों में हिस्सा लिए हैं?
पद्मा – मैंने अभी तक 6 नेशनल कराते चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है- रायपुर, सोलन, शिमला, धर्मशाला, दिल्ली का इंडिपेंडेंस कप और गोवा। जिसमें 5 सिल्वर, एक ब्रॉन्ज और 2 गोल्ड मैडल प्राप्त हुवे। इसके अलावा दो इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिए जिसमे 8 से ज्यादा देशों के खिलाडी शामिल हुवे थे। विजाग 2016 में सिल्वर और ब्रांज जबकि अभी 2019 में गोल्ड और सिल्वर प्राप्त हुआ।

प्रश्न – जो बच्चे खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं उनके परिजनों को क्या सन्देश देना चाहेंगी?
पद्मा – यही की खेलने दें। पढ़ाई भी जरुरी है लेकिन इतना भी नहीं की बच्चे अपने स्किल को उभार न सकें। इसके अलावा पेरेंट्स किसी अन्य बच्चे या खिलाड़ी से तुलना नहीं करें। इसके अलावा स्कूल के शिक्षकों से भी मानसिक और आर्थिक सपोर्ट मिलना जरुरी है।

प्रश्न – अनेक ऐसे बच्चे जिनको खेलों में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता उनके लिए क्या किया जा सकता है?
पद्मा- बच्चे तो खेलना चाहते हैं। राज्य में ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट हों ताकि ज्यादा से ज्यादा खेलने के अवसर मिलें। पैसे की कमी नहीं खेलने का कारण न बने। स्कूलों से प्रोत्साहन मिले। राजनीति और खेल में पर्याप्त दूरी बानी रहे।

प्रश्न – क्या खेल से अच्छा भविष्य बनाया जा सकता है?
पद्मा – जी हां बिल्कुल। लगन और ध्यान से अभ्यास किया जाये तो कुछ भी कठिन नहीं। आज तो खिलाडियों को समाज और सरकार दोनों में महत्व मिलता है। खेल से भी सपने पूरे किये जा सकते हैं। कुछ नहीं तो अच्छे खेल प्रशिक्षक तो बन ही सकते हैं।

प्रश्न – भविष्य में कराते के क्षेत्र में क्या करना चाहती हैं?
पद्मा – अच्छी प्लेयर बनना चाहती हूँ। कराटे में भारत का प्रतिनिधित्व ओलिंपिक में करने का स्वप्न है। कुछ ऐसा करना चाहती हूँ जिससे राज्य और देश और गुरुजनों का नाम ऊँचा हो सके।

प्रश्न – अपनी अन्य रुचियों के बारे में बताइये।
पद्मा- कराते ही प्राथमिकता है। फिर भी इसके अलावा हॉलीवुड बॉलीवुड की फिल्में देखना, अच्छे गीत सुनना, अलग अलग विषयों की किताबें पढ़ना। अच्छी नोवेल्स पढ़ना यही रुचियां हैं।